ब्लैक मनी पर सर्जिकल स्ट्राइक से पहले मोदी सरकार ने उठाए ये 7 कड़े कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालाधन पर लगाम लगाने के लिए 500 और एक हजार के नोट मंगलवार की आधी रात से बंद करने की घोषणा की है. पीएम मोदी की घोषणा भले ही चौंकाने वाली है, लेकिन इसकी नींव पिछले दो साल से रखी जा रही थी. मई 2014 में सत्ता में बीजेपी सरकार ने काला धन वापस लाने और लगाम लगाने संबंधी बात चुनावी घोषणा पत्र में कहा था. सरकार बनते ही मोदी ने कई कड़े कदम उठाए.

कालाधन पर मोदी सरकार ने लगाया लगाम
मुकेश कुमार
  • नई दिल्ली,
  • 09 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालाधन पर लगाम लगाने के लिए 500 और एक हजार के नोट मंगलवार की आधी रात से बंद करने की घोषणा की है. पीएम मोदी की घोषणा भले ही चौंकाने वाली है, लेकिन इसकी नींव पिछले दो साल से रखी जा रही थी. मई 2014 में सत्ता में आई बीजेपी सरकार ने काला धन वापस लाने और इस पर लगाम लगाने संबंधी बात चुनावी घोषणा पत्र में कहा था. सरकार बनते ही मोदी ने कई कड़े कदम उठाए.ब्लैक मनी पर सर्जिकल स्ट्राइक...मोदी सरकार के 7 कड़े कदम 1- ब्लैक मनी पर SIT का गठनसत्ता में आने के साथ ही मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर काले धन के खिलाफ एसआईटी का गठन करने का फैसला किया. इस एसआईटी में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एमबी शाह अध्‍यक्ष और रिटायर्ड जज जस्टिस अरिजित पसायत उपाध्‍यक्ष बने थे.2- जन धन योजनाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री जन धन योजना का शुभारंभ किया था. इस योजना में मोदी ने व्यक्तिगत रुचि दिखाई थी. जिन लोगों के बैंक में किन्ही वजहों से खाते नहीं खुल पाते थे, उनके खाते खुल गए. जिसकी वजह से पहले ही दिन देश भर में रिकॉर्ड 1.5 करोड़ बैंक खाते खोले गए. योजना के तहत इस समय तक 25.45 करोड़ लोगों के बैक अकाउंट खुल गए हैं.इस तरह दूर-दराज गांव के लोग जिनके पास बैंक अकाउंट नहीं था और वे अपने पैसे जमा नहीं कर पाते थे, उनको ये सुविधा मिली. 3- कर संधियों की पुन: वार्ता और स्वत: सूचना विनिमय समझौतेकाले धन की लड़ाई में सबसे प्रमुख रोड़ा था लोगों द्वारा काला धान स्विस बैंकों में जमा करना. दो देशों की बीच होने वाले अहम समौझते की वजह से भारत सरकार को ऐसे लोगों के नाम पता करने और उसका खुलासा करने में समस्या आ रही थी. इसलिए मोदी सरकार ने स्विस बैंकों में रखे गए काले धन के बारे में सूचना साझा करने के मकसद से भारत और स्विट्जरलैंड के बीच संशोधित दोहरा कर बचाव संधि (डीटीएए) को अमल में लाने का प्रयास किया. डीटीएए के तहत कई देशों के समझौते किए गए. आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के देश साल 2017 से अपने वहां काला धन जमा करने वालों के नाम की लिस्ट देने के लिए सहमत हो गए हैं.4- विदेशी काला धन और इम्‍पोजिशन ऑफ टैक्‍स एक्ट, 2015विदेशो में भारतीय काला धन पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने कालाधन और इम्‍पोजिशन ऑफ टैक्‍स एक्ट, 2015 को संसद में पारित किया था. इसके साथ ही सरकार ने कालाधन कानून के तहत विदेश से होने वाली आय और संपत्ति का मू्ल्यांकन के नियमों को लागू कर दिया. यह नियम 1 जुलाई, 2015 से लागू किया गया. इसमें विदेशी संपत्तियों और आय का खुलासा नहीं करने पर सख्‍त सजा का प्रावधान किया गया है. इसके जरिए विदेशी संपत्तियों से होने वाली आय को छुपाने और कर चोरी पर 10 साल की सजा हो सकती है. इसके अलावा 300 प्रतिशत जुर्माना भी लगाया जाएगा. वहीं नए कानून के बाद दोषी को सेटलमेंट कमीशन के पास जाने की भी अनुमति नहीं होगी. अघोषित विदेशी संपत्ति से होने वाली आय पर अधिकतम दर से टैक्स लगेगा और कोई छूट या कटौती अगर लागू है, तो नहीं मिलेगी.5- इनकम डिक्लेरेशन स्कीम, 2016मोदी सरकार ने काला धन पर लगाम लगाने के लिए आईडीएस इनकम डिक्लेरेशन स्कीम 1 जून 2016 से लागू किया. यह स्कीम 30 सितंबर तक जारी रहा. काले धन को बाहर लाने के लिए यह स्कीम बनाई गई. इस स्कीम के तहत काले धन का खुलासा करने वाले को 45 फीसदी टैक्स देना था. इस टैक्स को किस्तों में चुकाने की सुविधा थी. नगदी में भी टैक्स जमा किया जा सकता था. इसके तहत काला धन घोषित करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. काला धन घोषित करने वालों का नाम पुरी तरह से गुप्त रखा गया.6- रियल एस्टेट में काले धन पर लगाममोदी सरकार ने रियल एस्टेट में काले धन पर लगाम लगाने के लिए इनकम टैक्स एक्ट में भी बदलाव किया. इस एक्ट के सेक्शन 269SS और 269T के प्रावधान में संशोधन किया गया. इसके तहत रियल एस्टेट में 20 हजार से ज्यादा के नगद लेन-देन पर रोक लगा दी गई. इसे ज्यादा लेन-देन पर 20 फीसदी जुर्माना लगाया गया. 1 लाख से ज्यादा की खरीददारी और संपत्ति की बिक्री पर पैन देना अनिवार्य कर दिया गया.7- बेनामी लेन-देन (प्रतिबंध) संशोधनकाले धन पर अंकुश लगाने के बेनामी लेन-देन (प्रतिबंध) संशोधन बिल को संसद में पास किया गया. यह 1 नवंबर 2016 को लागू हो गया. इसके जरिए रियल एस्टेट और सोने की खरीदारी में बेनामी रूप से हो रहे लेन-देन पर लगाम लगाई जाएगी. इस विधेयक में विदेश में काला धन छिपाने वालों को दस साल तक की सजा और नब्बे फीसद का जुर्माना लगाने का प्रावधान है. यह जुर्माना उस पर लगने वाले तीस प्रतिशत कर के अतिरिक्त होगा. नए कानून में यह प्रावधान भी है कि रिटर्न फाइल करने में संपत्ति की जानकारी छिपाने पर सात साल तक की सजा होगी.

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