इच्छा मृत्यु पर सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक पीठ का फैसला शुक्रवार को

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि हम ये देखेंगे कि इच्छा मृत्यु में यानी इच्छा मृत्यु के लिए वसीयत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हो. इस प्रक्रिया के दौरान दो स्वतंत्र गवाह भी मौजूद हों. कोर्ट इस मामले में पर्याप्त सेफगार्ड देगा ताकि इसका दुरुपयोग नहीं हो.

सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो- PTI)
अजीत तिवारी/संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 08 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 4:06 AM IST

इच्छा मृत्यु के मामले पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का फैसला शुक्रवार को आएगा. मानवीय पहलू से जुड़े इस कानूनी पेंच वाले मामले की सुनवाई के दौरान संविधान पीठ ने टिप्पणी की थी कि 'राइट टू लाइफ' में गरिमापूर्ण जीवन के साथ-साथ गरिमामय ढंग से मृत्यु का अधिकार भी शामिल है' ऐसा हम नहीं कहेंगे.

हम ये कहेंगे कि गरिमापूर्ण मृत्यु पीड़ा रहित होनी चाहिए. कुछ ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए जिसमें गरिमापूर्ण तरीके से मृत्यु हो सके. संवैधानिक पीठ का फैसला शुक्रवार सुबह साढ़े दस बजे आएगा.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि हम ये देखेंगे कि इच्छा मृत्यु में यानी इच्छा मृत्यु के लिए वसीयत मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हो. इस प्रक्रिया के दौरान दो स्वतंत्र गवाह भी मौजूद हों. कोर्ट इस मामले में पर्याप्त सेफगार्ड देगा ताकि इसका दुरुपयोग नहीं हो.

वहीं, केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर कहा था कि इच्छा मृत्यु पर अभी सरकार सारे पहलुओं पर गौर कर रही है और इस मामले में आम जनता और इस क्षेत्र में काम कर रहे सामाजिक संगठनों से सुझाव भी मांगे गए हैं.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ में इच्छा मृत्यु यानी लिविंग विल का विरोध किया. लेकिन, पैसिव यूथेनेशिया को मंजूर करते हुए कहा कि इसके लिए कुछ सुरक्षा मानकों के साथ ड्राफ्ट बिल तैयार है.

केंद्र सरकार ने कहा अरूणा शॉनबाग के मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के आधार पर पैसिव यूथेनेशिया को मंजूर करते हैं जो कि देश का कानून है. इसके तहत जिला और राज्य स्तर पर मेडिकल बोर्ड ऐसे मामलों में पैसिव यूथेनेशिया पर फैसला लेंगे, लेकिन केंद्र ने कहा इच्छा मृत्यु जिसमें मरीज कहे कि वो अब मेडिकल स्पोर्ट नहीं चाहता, उसे मंजूर नहीं किया जा सकता.

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