संघ का भूत, भविष्य और वर्तमान बताएगी यह किताब, मोहन भागवत करेंगे विमोचन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर यूं तो अब तक तमाम पुस्तकें लिखीं गईं, मगर अब आधिकारिक और प्रमाणिक तथ्यों के साथ एक किताब आ रही है, जिसे संघ में तीन दशक से भी अधिक समय से काम कर रहे वरिष्ठ प्रचारक सुनील आंबेकर ने लिखी है. आंबेकर पिछले 15 वर्षों से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री हैं. किताब का एक अक्टूबर को नई दिल्ली में संघ प्रमुख मोहन भागवत विमोचन करेंगे.

RSS प्रमुख मोहन भागवत संघ पर आ रही किताब का करेंगे विमोचन. (फाइल फोटो-PTI)
नवनीत मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 26 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 1:54 PM IST

  • संघ के भूत, भविष्य, वर्तमान पर उठते सवालों का जवाब देगी किताब
  • एबीवीपी के संगठन मंत्री सुनील आंबेकर ने लिखी है किताब
  • संघ प्रमुख मोहन भागवत 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में करेंगे विमोचन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की हिंदू राष्ट्र परिकल्पना में मुस्लिमों का स्थान क्या है? संघ कैसे काम करता है, इसकी कार्यपद्धति क्या है, देश के इतिहास के पुनर्लेखन को लेकर संघ की क्या योजना है, संघ की बैठकों में कैसे निर्णय लिए जाते हैं, 21 वीं सदी में उभरकर सामने आ रहे नए-नए ज्वलंत सामाजिक मुद्दों पर संघ की सोच क्या है, संघ पुरातन बनाम आधुनिक विचारों की बहस में कहां खड़ा है, भविष्य में संघ की क्या योजनाएं हैं?

ये वे सवाल हैं, जो संघ का अक्सर पीछा करते हैं, समय-समय पर उठते इन सवालों का जवाब देने के लिए अब किताब आ रही है. इसे लिखा है वरिष्ठ प्रचारक सुनील आंबेकर ने. पिछले 15 वर्षों से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में राष्ट्रीय संगठन मंत्री का दायित्व देख रहे सुनील आंबेकर की लिखी यह पहली ऐसी किताब है, जो आधिकारिक और प्रमाणिक रूप से एक साथ आरएसएस का भूत, भविष्य और वर्तमान बताएगी. इसमें राम मंदिर, समान नागरिक संहिता, हिंदुत्व और जाति-व्यवस्था आदि मुद्दों पर भी आंबेकर ने संघ के नजरिए से रौशनी डाली है.

किताब का नाम है 'आरएसएस- रोडमैप फॉर द 21 सेंचुरी '(RSS Roadmap For The 21st Century). चूंकि इसे संघ के ही वरिष्ठ प्रचारक ने लिखा है, ऐसे में इस किताब में काल्पनिक या सुनी-सुनाई बातें नहीं बल्कि संघ से जुड़ी यथार्थ बातों को जगह दी गई है.

इस किताब का संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में विमोचन करेंगे. यह किताब आरएसएस को लेकर उठते हर सवालों का जवाब देगी. बताया जा रहा है कि यह ऐसी पुस्तक है जिसे पढ़कर जहां संघ समर्थक संगठन को और गहराई से जान सकेंगे, वहीं बाहरी लोगों को भी संघ की कार्यपद्धति के बारे में एक वरिष्ठ प्रचारक की नजर से जानने का मौका मिलेगा.

सुनील आंबेकर की किताब आरएसएस- रोडमैप फॉर द 21 सेंचुरी का 1 अक्टूबर को संघ प्रमुख भागवत करेंगे विमोचन.

संघ सूत्रों का कहना है कि दरअसल, प्रचार से दूर, चुपचाप अपने काम करने के विशेष तरीके से आरएसएस हमेशा सुर्खियों में रहता है. कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में संघ नेताओं के बयानों चर्चा में भी रहते हैं. विरोधी समय-समय पर संघ का नाम लेकर एक खतरे की आशंका जताते हैं. बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से संघ की तरफ लोगों की दृष्टि और ज्यादा गई है. देश ही नहीं विदेशों में भी संघ को लेकर खूब बातें होतीं हैं. हाल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बीजेपी से ज्यादा आरएसएस पर हमला बोला था.

संघ को लेकर इससे पूर्व कई किताबें आ चुकीं हैं, फिर भी तमाम सवाल पीछा नहीं छोड़ रहे. ऐसे में संघ को भी लगा कि अब वरिष्ठ प्रचारक के स्तर से आधिकारिक तथ्यों के साथ किताब जारी कर संगठन को लेकर फैली तमाम गलतफहमियों का काउंटर करना चाहिए. बताना चाहिए कि संघ वैसा कुछ नहीं सोचता, जैसा कि विरोधी बताते हैं. संघ के पूर्व सरसंघचालक बाला साहब देवरस भी अपने जमाने में पत्र-पत्रिकाओं के जरिए संघ की सोच को आधिकारिक रूप से समाज के सामने रखते थे.

क्या मानते हैं सुनील आंबेडकर

सुनील आंबेकर का मानना है कि संघ का काम हिंदू समाज को संगठित करना और समाज की शक्ति को सामने लाना है. संघ की 90 वर्ष की यात्रा में कई आयाम विकसित हुए. ऐसे में लोग जानना चाहते है कि संघ का स्वरूप क्या है, कैसे काम करता है.

21वीं सदी के जो मुद्दे आ रहे हैं, उस पर संघ की क्या राय है? इस दृष्टि से यह पुस्तक लिखी गई है. आंबेकर के मुताबिक, संघ शुरू से ही ऐसा संगठन रहा, जिसके लिए प्राथमिकता पहले नाम या संविधान नहीं था. संघ का काम पहले शुरू हुआ, बाद में शाखा, संविधान और संरचना तय हुई. सुनील आंबेकर का मानना है कि संघ का समाज में रोल शुगर (चीनी) जैसा है. वह समाज में घुलमिलकर काम करता है.

15 साल से संगठन मंत्री हैं आंबेकर

सुनील आंबेकर आरएसएस के वरिष्ठ  प्रचारक हैं. इस वक्त वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय संगठन मंत्री हैं. वह 2003 से इस पद पर हैं. जीव विज्ञान में मास्टर्स की पढ़ाई करने वाले आंबेकर बचपन में ही संघ के स्वयंसेवक बन गए थे. वह नागपुर से आते हैं. विदर्भ क्षेत्र में संघ के क्षेत्रीय संगठन मंत्री से शुरू हुआ दायित्व अब एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री तक पहुंचा है. आंबेकर की गिनती संघ के ऊर्जावान स्वयंसेवकों में होती है.

समय-समय पर सुनील आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में जाते रहे हैं. 2018 में रूस में हुए राष्ट्रपति चुनाव में वह भारत की तरफ से अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक बनकर गए थे. वहीं कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के इंटरनेशनल डिपार्टमेंट चाइना एसोसिएशन फार इंटरनेशनल फ्रेंडली कांटैक्ट के बुलावे पर वह तीन सदस्यीय दल के साथ चीन का दौरा कर चुके.

शिक्षा सुधारों को लेकर लंबे समय से मुहिम चलाने वाले कार्यकर्ता की पहचान रही है. राष्ट्रीय संस्थानों के छात्रों के लिए 'सोचो भारत' नामक मंच से जुड़कर काम कर चुके हैं. बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ आंदोलन चला चुके हैं. यूथ अगेंस्ट करप्शन मुहिम के सलाहकार सदस्य रह चुके हैं.

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