मोंटेक सिंह का दावा- राहुल के अध्यादेश फाड़ने पर इस्तीफा देना चाहते थे पूर्व PM मनमोहन सिंह

यूपीए शासनकाल के दौरान 2013 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक आर्डिनेंस को फाड़े जाने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उस समय के योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से पूछा था, क्या मुझे इस्तीफा दे देना चाहिए?

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योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह (फाइल फोटो) योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 फरवरी 2020,
  • अपडेटेड 9:38 AM IST

  • आर्डिनेंस को फाड़ने के मसले पर नाराज थे मनमोहन सिंह
  • योजना आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष ने किताब में किया दावा

यूपीए शासनकाल के दौरान 2013 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक आर्डिनेंस को फाड़ दिया था. इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उस समय के योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया से पूछा था, क्या उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए? हालांकि तब मोंटेक ने उन्हें ऐसा ना करने की सलाह दी.

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इसका खुलासा योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे अहलूवालिया ने अपनी किताब ‘बेकस्टेज : द स्टोरी बिहाइंड इंडियाज हाई ग्रोथ ईयर्स’ में किया है. मनमोहन सिंह के सवाल पर अहलूवालिया ने उन्हें जवाब दिया कि इस मुद्दे पर इस्तीफा देना सही नहीं है. पीएम मनमोहन सिंह के साथ अहलूवालिया उस वक्त अमेरिका के दौरे पर थे. बता दें कि मोदी सरकार ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद योजना आयोग को भंग कर नीति आयोग का गठन किया था.

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अहलूवालिया ने रविवार को अपनी नई किताब 'बैकस्टेज : द स्टोरी बिहाइंड इंडियाज हाई ग्रोथ ईयर्स' में दिए तथ्यों का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय मनमोहन सिंह सरकार के लाए विवादित अधिनियम को राहुल गांधी ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके फाड़ डाला था. तब अहलूवालिया ने मनमोहन सिंह से कहा था कि ऐसे समय में उनका इस्तीफा देने ठीक नहीं होगा.

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बेकस्टेज : द स्टोरी बिहाइंड इंडियाज हाई ग्रोथ ईयर्स

उस समय राहुल गांधी ने अपनी ही सरकार के फैसले को बकवास करार देते हुए अधिनियम के दस्तावेजों की प्रति को मीडिया के सामने ही फाड़ कर फेंक दी थी. यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश पर यूपीए सरकार की ओर से लाया गया था. इसमें दोषी सांसदों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमल के लिए सरकार अध्यादेश लेकर आई थी.

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मनमोहन सिंह ने अमेरिका से स्वदेश लौटने पर अपने इस्तीफे की अटकलों से साफ इनकार कर दिया था. हालांकि इस पूरे प्रकरण से वह आहत जरूर थे. अहलूवालिया ने उस दौर को याद करते हुए बताया, 'मैं उस समय न्यूयॉर्क में प्रधानमंत्री के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा था, और मेरे भाई संजीव, जो आईएएस पद से रिटायर हो चुके हैं, ने मुझे फोन करके बताया कि उन्होंने एक लेख लिखा है जो पीएम के लिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने मुझे वह लेख ई-मेल किया और पूछा कि यह उन्हें शर्मसार करने वाला तो नहीं है?'

यह लेख अहलूवालिया के भाई का होने के नाते मीडिया में बेहद चर्चा में रहा था. मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने किताब में लिखा, 'मैंने पहला काम यह किया कि उस लेख का टेक्सट लेकर मैं पीएम के पास गया. मैं चाहता था कि इसके बारे में सबसे पहले वह मेरे मुंह से सुनें. उन्होंने उसे शांति से पढ़ा और कोई टिप्पणी नहीं की. फिर यकायक उन्होंने पूछा, क्या वह सोचते हैं कि मैं इस्तीफा दे दूं?' मोंटेक ने बताया, 'मेरे विचार से इस मुद्दे पर इस्तीफा देना उपयुक्त नहीं होगा. फिर मैंने यह सोचा कि क्या मैं उनसे वह कह रहा हूं जो वह सुनना चाहते हैं. लेकिन मैं मानता हूं कि मैंने उन्हें सही सलाह दी थी.'

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(PTI के इनपुट के साथ)

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