पीएनबी घोटाले के बाद देश में राजनीतिक माहौल काफी गरम हो गया है, सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर इस महाघोटाले का आरोप लगाने में जुट गए हैं. बावजूद इसके, आंकड़े बताते हैं कि सरकारी बैंकों के साथ ही सबसे ज्यादा फ्रॉड होते रहे हैं.
पंजाब नेशनल बैंक की मुंबई स्थित ब्रीच कैंडी ब्रांच में 11,360 करोड़ रुपये का घोटाले के बाद करोड़ों आम खाताधारक घोटाले को लेकर स्तब्ध हैं और वह अपने पैसे को सुरक्षित जगह रखने के लिए फिर से सोचने को मजबूर हो गए हैं.
SBI के साथ सबसे ज्यादा फ्रॉड
आम लोग अपने पैसे निजी बैंकों की तुलना में सरकारी बैंकों में जमा करने को तरजीह देते रहे हैं, लेकिन इंडिया स्पेंड की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि पिछले 3 सालों में सरकारी बैंकों के साथ फ्रॉड के मामले सबसे ज्यादा हुए हैं. देश के 21 सरकारी बैंकों में शीर्ष 5 पायदान पर सरकारी बैंक ही हैं.
2014-15 से 2016-17 के बीच सरकारी बैंकों में कुल 8,168 मामले फ्रॉड के दर्ज हुए. इसमें सबसे खराब स्थिति देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की है. कुल फ्रॉड मामलों में अकेले 30 फीसदी फ्रॉड तो एसबीआई के साथ हुआ, उसके बाद बैंक ऑफ बड़ोदा (9.5%) और सिंडिकेट बैंक (6.8%) का नंबर आता है.
फ्रॉड मामले में 5वें नंबर पर PNB
अगर पिछले 3 सालों में फ्रॉड के दर्ज मामलों को संख्या के आधार पर देखें तो 8,168 फ्रॉड केसों में एसबीआई के साथ 2,466 फ्रॉड हुए. बैंक ऑफ बड़ौदा, सिंडिकेट बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के साथ क्रमशः 782, 552 और 527 फ्रॉड के मामले सामने आए.
महाघोटाले के कारण 11,360 करोड़ रुपये गंवाने वाला पीएनबी फ्रॉड का सामना करने के मामले में पांचवें पायदान पर है और उसके साथ इन 3 सालों में 5.7% यानी 471 फ्रॉड हुए. इस महाघोटाले को भी कर्मचारी और खाताधारकों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया.
निजी बैंक भी फ्रॉड से परेशान
जनवरी 2015 से लेकर मार्च 2017 के बीच 5,200 फ्रॉड या भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी बैंकों से जुड़े कर्मचारी ही दोषी पाए गए. इस मामले में भी एसबीआई सबसे आगे है. एसबीआई में ऐसे 1,538 मामले सामने आए. जबकि ओवरसीज बैंक (449) और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (406) दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे.
ऐसा नहीं है कि फ्रॉड के मामले सिर्फ सरकारी बैंकों के साथ ही हुए हैं, निजी बैंक भी इस समस्या से त्रस्त हैं. 2014-15 से 2016-17 के बीच सरकारी और निजी बैंकों में फ्रॉड के 12,778 मामले सामने आए. इसमें 67 फीसदी मामलों (8,622 मामले) के साथ सरकारी बैंक सबसे ज्यादा पीड़ित रहे. इसमें से 1,714 फ्रॉड के मामलों में बैंक के कर्मियों की मिलीभगत रही.
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