आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एक शोध पत्र में कहा गया है कि तेल संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल तथा वैकल्पिक ऊर्जा आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत है क्यों की भविष्य में तेल उत्पादन की क्षमता की गुंजाइश कम होती जाएगी.
रिपोर्ट में कहा गया है कि हम ऐसे बिंदु पर पहुंच चुके हैं जहां से भविष्य की बढ़ती मांग के लिए ईंधन आपूर्ति की क्षमता सिमटने वाली है. ऐसे में जरूरत इस बात की है कि तेल के उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल संभलकर किया जाए. रिपोर्ट में कहा गया है कि सस्ते तेल के दिन अब लद चुके हैं, क्योंकि आपूर्ति की तुलना में मांग ज्यादा तेजी से बढ़ रही है.
तेल का अनुमानित भंडार 1,150 से 1,350 अरब बैरल से घटकर 850 से 900 अरब बैरल रह गया है. स्मिथ स्कूल लो कार्बन मोबिलिटी सेंटर के प्रमुख ओलिवर इंडरविल्डी ने कहा, ‘ईंधन तथा खाद्यान्न की जरूरत को पूरा करने के लिए उचित मात्रा में भूमि उपलब्ध नहीं है. हमें अपनी उर्जा दक्षता बढ़ाकर शेष संसाधनों को बेहतर इस्तेमाल करना होगा.’
शोध रिपोर्ट में कहा गया है कि हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था तथा इलेक्ट्रिक परिवहन जैसे विकल्प अभी परिपक्व नहीं हैं. ये विकल्प मध्यम से दीर्घावधि में ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा सुरक्षा तथा उत्सर्जन कटौती के लिए वैकल्पिक ईंधन संसाधनों के विकास का काम तेज किए जाने की जरूरत है.
स्मिथ स्कूल के निदेशक सर डेविड किंग ने कहा, ‘पिछले दो साल में हमने वित्तीय क्षेत्र में जो अनिश्चितता देखी है वैसा ही कुछ भविष्य में हमें तेल के मामले में देखना पड़ सकता है.’ किंग ने कहा कि यदि सरकारों और उद्योगों ने शीघ्रता न की तो यह चुनौती हमारी अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घावधि में प्रभावित कर सकती हैं.
रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि बढ़ती तेल की मांग को पूरा करने के लिए गैर परंपरागत तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. मसलन कनाडा में तारकोल से ईंधन निकाला जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह के गैर परंपरागत तरीकों का दोहरा दुष्प्रभाव पड़ रहा है. परंपरागत तरीके से खुदाई की तुलना में ऐसे तरीकों से कार्बन का उत्सर्जन ज्यादा होता है. साथ ही ऐसे ईंधन के इस्तेमाल से भी कार्बन का उत्सर्जन अधिक होता है.
भाषा