एनजीटी ने दिल्ली में बाहर के राज्यों से आनी वाली 10 साल पुरानी डीजल बसों पर लगाम लगाने के लिए दर्जन भर राज्यों को इन बसों को सीएनजी में बदलने के निर्देश दिये है. दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए एनजीटी ने यूपी, पंजाब, हरियाणा राज्यस्थान और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों को दस और पंद्रह साल पुरानी बसों को सीएनजी में बदलने का आदेश दिया है. एनजीटी ने सभी राज्य सरकारों को बसों को सीएनजी में बदलने को लेकर अपना जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है.
इससे पहले एनजीटी ने राजधानी दिल्ली में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों को बैन का आदेश दे चुकी है, हालांकि एनजीटी ने यह आदेश कौशांबी वेलफेयर एसोसिएशन की यचिका पर दिया है. कौशांबी वेलफेयर एसोसिएशन ने याचिका लगाकर एनजीटी से यह मांग की थी कि आनंद बिहार टर्मिनल पर बाहर राज्यों से सैकड़ों पुरानी बसों का जमावाड़ा लगा रहता है, इन बसों से वायु प्रदूषण के साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी होता है. वहीं पिछली सुनवाई के दौरान एनजीटी ने दिल्ली सरकार और यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था.
दिल्ली सरकार ने एनजीटी में कहा था कि सरकार के स्तर को कम करने के गाड़ियों से पानी का छिड़काव कर रही है, फिलहाल एनजीटी ने दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए तमाम राज्यों को पुरानी बसों को सीएनजी में बदलने का आदेश तो दे दिया है लेकिन एनजीटी के इस निर्देश का सभी राज्य सरकारें पालन कितना करती है, यह एक बड़ा सवाल है.
पूनम शर्मा