अगले वित्तीय वर्ष में आम बजट जनवरी महीने में पेश किया जा सकता है. नरेंद्र मोदी सरकार बजट को लेकर चली आ रही ब्रिटिश कालीन परंपरा को खत्म करने की दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है. ऐसा हुआ तो अब तक फरवरी महीने के आखिरी दिनों में पेश होता आ रहा बजट जनवरी में पेश किया जा सकता है.
मंत्रालयों को बजट आवंटन में देरी होने का मामला
'टाइम्स ऑफ इंडिया' में छपी खबर के मुताबिक किए जाने के समय को लेकर अंतिम फैसला किया जाना बाकी है. वित्त मंत्रालय में चर्चा है कि आर्थिक नीतियों के अमल में
तेजी लाने के लिए यह नया कदम उठाया जा सकता है. अबतक बजट के मुताबिक 31 मार्च को वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद मंत्रालयों को बजट की रकम आवंटित होने में मई महीने तक
इंतजार करना पड़ रहा है.
गणतंत्र दिवस के साथ ही होगी बजट की तैयारी
मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक इस मामले में फिलहाल आखिरी फैसला नहीं किया गया है, लेकिन इसे जनवरी महीने के आखिरी दिनों में किया जा सकता है. गणतंत्र दिवस की
तैयारियों के साथ ही इसको लेकर भी गतिविधियां तेज की जा सकती है. फिलहाल टैक्स बदलाव और वित्त विधेयकों को संसद मई महीने के दूसरे सप्ताह में बहस करने के बाद पास करती है.
वाजपेयी सरकार ने वक्त बदलकर की थी शुरुआत
बजट के साथ ही सरकार वित्तीय वर्ष में कुछ हफ्तों के विस्तार के लिए संसद की मंजूरी चाहती है. आर्थिक नीतियों के मद्देनजर सरकार ने अगले वित्त वर्ष में ठोस कदम उठाने के संकेत दिए हैं. सरकार की दलील है कि पेश किए जाने के तारीख और वक्त को लेकर कोई ठोस प्रावधान नहीं किए गए हैं. साल 1999 तक बजट शाम के 5 बजे पेश किए जाते रहे हैं. ब्रिटिशकालीन इस परंपरा को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने बदलकर बजट पेश किए जाने का समय दिन के 11 बजे कर दिया था.
केशव कुमार