बीजेपी और एनडीए के उम्मीदवार वेंकैया नायडू ने उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन भर दिया. पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत एनडीए कुनबे के सभी बड़े नेता मौजूद थे. नामांकन के बाद वेंकैया नायडू ने कहा कि उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं. वेंकैया ने कहा कि राजनीतिक जीवन में 40 साल से हूं और यात्रा करना और लोगों से मिलना मेरा पैशन है.
माना जा रहा है कि वैंकैया नायडू उपराष्ट्रपति नहीं बनना चाहते थे. अध्यक्ष अमित शाह ने उनसे पूछा था तो ये कहते हुए वैंकैया ने मना कर दिया था कि वो टीम मोदी में बने रहना चाहते हैं. लेकिन बाद में पीएम मोदी ने फ़ोन कर वैंकैया को राजी किया. 40 साल तक पार्टी से जुड़े रहने के बाद उससे अलग होना वेंकैया नायडू के लिए भी इमोशनल मूवमेंट था.
वेंकैया ने कहा बहुत छोटा था जब मां का निधन हो गया था. इसके बाद पार्टी को ही मां समझा. मैं चाहता था 2019 में मोदी जी फिर पीएम बनें तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा. लेकिन पार्टी का फैसला सबकुछ है.
की तरफ से नामांकन के दो सेट दाखिल किए गए हैं. पहले सेट में बतौर प्रस्तावक पीएम मोदी और अनुमोदक गृहमंत्री राजनाथ सिंह थे. दूसरे सेट में प्रस्तावक वित्त मंत्री अरुण जेटली और अनुमोदक विदेश मंत्री सुषमा स्वराज थीं.
उपराष्ट्रपति चुनाव में वर्तमान में कुल वोट 785 हैं (अभी राज्य सभा और लोक सभा में दो-दो सीटें खाली हैं) एनडीए के पास 425 सांसद हैं जिसमें मनोनीत और निर्दलीय सांसद शामिल हैं. मित्र दल एआईएडीएमके, बीजेडी, टीआरएस, वायएसआर कांग्रेस, पीएमके, एआईएनआर कांग्रेस के सांसदों की संख्या 101 है. एनडीए और मित्र दल मिलाकर हुए 526 सांसद. ने वेंकैया के लिए नीतीश और शरद पवार से भी समर्थन मांगा है. वहीं यूपीए के पास 230 सांसद हैं. जेडीयू, जेडीएस, एनसीपी के पास 31 सांसद हैं. इन दलों के साथ आने के बाद यूपीए की ताकत 261 ही होती है.
मतलब साफ है कि इस चुनाव में सिर्फ औपचारिकता ही रह गई है. संसद के संख्या बल के गणित को देखें तो का हारना और वेंकैया नायडू का उपराष्ट्रपति बनना तय है.
हिमांशु मिश्रा