MP: मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा खत्म होने के बाद यहां के टमाटर को तरसेगा पाकिस्तान

पाक‍िस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा समाप्त होने के बाद अब देश में हर स्तर पर व‍िरोध करने वाले भी सक्र‍िय हो गए हैं. मध्य प्रदेश में झाबुआ के टमाटर उत्पादकों ने तय क‍िया है क‍ि वे पाक‍िस्तान को टमाटर न‍िर्यात नहीं करेंगे. उनके इस कदम की मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री ने भी जमकर प्रशंसा की है.

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झाबुआ के क‍िसानों का टमाटर (Photo:aajtak) झाबुआ के क‍िसानों का टमाटर (Photo:aajtak)

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल,
  • 20 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 6:41 PM IST

पुलवामा हमले के बाद पूरे देश मे पाकिस्तान के खिलाफ गुस्से की लहर है. वहीं, अब मध्यप्रदेश के झाबुआ के टमाटर उत्पादक किसानों ने तय किया है कि वो पाकिस्तान को टमाटर निर्यात नहीं करेंगे.

आपको बता दें कि मध्यप्रदेश और गुजरात की सीमा पर बसे झाबुआ जिले की पेटलावद तहसील के 5 हजार किसान टमाटर उगाते हैं. इनमें से ज्यादातर किसान पाकिस्तान को टमाटर निर्यात करते हैं लेकिन केंद्र सरकार द्वारा पाकिस्तान का मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा समाप्त करने के बाद इन किसानों ने तय किया है कि वो पाकिस्तान को टमाटर नहीं भेजेंगे.

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पेटलवाद के क‍िसानों ने टमाटर पाक‍िस्तान न भेजने का ल‍िया न‍िर्णय.

किसानों का कहना है कि पेटलावद में उगने वाला टमाटर एक्सपोर्ट क्वाल‍िटी का होता है जिसकी पाकिस्तान में खासी मांग है. वहां निर्यात करने पर मुनाफा भी अच्छा होता है लेकिन पुलवामा में हुए हमले के बाद किसानों ने मुनाफे से ज्यादा पाकिस्तान को सबक सिखाने की ठानी है.

कमलनाथ और शिवराज ने की तारीफ

किसानों के इस निर्णय की मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने तारीफ की है. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'पुलवामा हादसे व आतंकी घटनाओं के विरोध में झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील के किसान भाइयों द्वारा अपने मुनाफे की परवाह न कर पाकिस्तान टमाटर नहीं भेजने के निर्णय को सलाम करता हूं, देशभक्ति से भरे इस जज्बे की प्रशंसा करता हूं. हर देशवासी को इनसे प्रेरणा लेना चाहिये.'

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वहीं,  मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी किसानों के इस फैसले का समर्थन किया है. शिवराज सिंह चौहान ने भी किसानों के लिए ट्वीट किया और लिखा, 'मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पेटलावद के किसान भाई नुक़सान उठा कर भी अपने टमाटर पाकिस्तान नहीं भेजेंगे, यह जान कर मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया. जय जवान, जय किसान.'

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