आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ा दिल्ली विधानसभा सत्र का पहला दिन

बीजेपी नेता विजेंदर गुप्ता ने कहा कि नियम में पहले सत्र को हर बार उपराज्यपाल संबोधित करते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया. गुप्ता ने कहा कि सरकार परंपरा तोड़ रही है और उसका संवैधानिक परंपराओं पर भरोसा नहीं है. गुप्ता के इस आरोप पर विधानसभा स्पीकर रामनिवास गोयल ने आपत्ति जताई.

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जारी है दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र जारी है दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र

कपिल शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 18 जनवरी 2017,
  • अपडेटेड 6:51 AM IST

दिल्ली विधानसभा का दो दिवसीय का सत्र शुरू हो चुका है हालांकि सत्र की घोषणा एक सप्ताह पहले ही कर दी गई थी. सत्र का पहला दिन एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में ही गुज़र गया. सत्र के पहले दिन जैसे ही कार्यवाही शुरु हुई, विपक्ष के नेता विजेंदर गुप्ता ने इस सत्र को गलत करार देते हुए कहा कि नियमों के मुताबिक नए साल के पहले सत्र के लिए परंपरा निर्धारित है.

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विजेंदर गुप्ता ने कहा कि नियम में पहले सत्र को हर बार उपराज्यपाल संबोधित करते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं किया गया. गुप्ता ने कहा कि और उसका संवैधानिक परंपराओं पर भरोसा नहीं है. गुप्ता के इस आरोप पर विधानसभा स्पीकर रामनिवास गोयल ने आपत्ति जताई. स्पीकर ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि पहले भी होता रहा है.

विधानसभा के स्पीकर ने दलील दी कि ये सत्र नया नहीं बल्कि पिछले सत्र का दूसरा भाग ही है. आम आदमी पार्टी के विधायकों ने सत्र के बहाने पूर्व एलजी नजीब जंग को घेरने का मौका भुनाने की पूरी कोशिश की. विधायकों ने सत्र में के आचरण पर चर्चा की मांग की, लेकिन स्पीकर ने इसकी इजाज़त नहीं दी.

सत्र के दौरान विधायक जितेंद्र तोमर ने राशन कार्ड बनाने में धांधली का मामला उठाया. इस सत्र में सत्ताधारी पार्टी के विधायकों ने बीजेपी की सत्ता वाली एमसीडी को घेरने की रणनीति अपनाई और पिछले दिनों हुई हड़ताल को लेकर बीजेपी के मेयर और पार्षदों पर निशाना साधा. उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि बीजेपी के पार्षद गैरकानूनी निर्माण कराने में व्यस्त हैं और एमसीडी भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई है.

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मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार ने 119 करोड़ रुपए एमसीडी को दिए लेकिन राजनीतिक कारणों से एमसीडी के नेताओं ने हड़ताल करवायई. उन्होंने कहा कि बीजेपी को पैसे का हिसाब देना चाहिए.

विपक्ष के नेता ने इसके विपरीत फंड के मामले में की और कहा कि सरकार एमसीडी के हिस्से का पूरा पैसा न देकर उन्हें आर्थिक तौर पर कमजोर बना रही है. ऐसा नगर निगम के चुनावों के मद्देनजर बीजेपी के सत्ता वाली निगमों को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है.

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