करतारपुर कॉरिडोर: ऑल वेदर ब्रिज न बनाने पर अड़ा पाकिस्तान, भारत में बाढ़ का खतरा!

भारत सरकार ने दावा किया है कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर का काम 45 फीसदी तक पूरा हो चुका है. वहीं पाकिस्तान की ओर से तय समझौते के मुताबिक दी गई डेडलाइन पर काम चल नहीं चल रहा है. सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से प्रोजेक्ट को लटकाने की कोशिश की जा रही है.

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पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब (फाइल फोटो) पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब (फाइल फोटो)

aajtak.in / जितेंद्र बहादुर सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 22 जून 2019,
  • अपडेटेड 9:02 PM IST

भारत सरकार ने दावा किया है कि करतारपुर साहिब कॉरिडोर पर भारत की ओर काम 45 फीसदी तक पूरा हो चुका है. वहीं पाकिस्तान की ओर से तय समझौते के मुताबिक दी गई डेडलाइन पर काम चल नहीं चल रहा है. सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की ओर से प्रोजेक्ट को लटकाने की कोशिश की जा रही है. भारत सरकार की योजना इस प्रोजेक्ट को 30 सितंबर तक पूरा करने की है.

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गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक भारत चाहता है कि पाकिस्तान अपने हिस्से में मौजूद ऑल वेदर रोड बनाए, लेकिन पाकिस्तान सिर्फ सीजनल रोड बना रहा है. भारत सरकार ने इसको लेकर पाकिस्तान के सामने एतराज जाहिर किया है. इस रोड पर बन रहे ब्रिज को भारत अपनी तरफ से तय डेडलाइन पर पूरा करना चाह रहा है, लेकिन पाकिस्तान अपनी तरफ ब्रिज बनाने को तैयार नहीं है. सूत्रों का कहना है कि अगर ये ब्रिज नहीं बनेगा तो पंजाब के कई इलाकों में बाढ़ के हालात पैदा हो जाएंगे. भारत चाहता है कि इस ब्रिज पर पाकिस्तान जल्द अपना काम पूरा करे.

सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ अब तक इस कॉरिडोर को लेकर चार बैठकें हो चुकी हैं. इसके बावजूद भी पाकिस्तान अभी इस कॉरिडोर को लेकर तय अंतर्राष्ट्रीय मानकों के मुताबिक भारत को कोई ठोस प्लान नहीं दे सका है. भारत 30 सितंबर तक इस प्रोजेक्ट का काम पूरा करने की योजना बना रहा है लेकिन पाकिस्तान कोई डेडलाइन नहीं दे रहा है.

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OCI कार्ड धारक

सूत्रों का कहना है कि भारत चाहता है कि 5000 श्रद्धालु रोजाना करतारपुर साहिब के दर्शन करें और किसी खास दिन जैसे बैसाखी, गुरुपूर्णिमा के समय 10000 यात्री प्रतिदिन दर्शन कर सकें, लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि भारत के सिर्फ 700 श्रद्धालु रोजाना दर्शन करेंगे. भारत के लिहाज से ये आंकड़ा बहुत कम है. सूत्रों ने बताया कि भारत ने मांग की है कि सभी भारतीय नागरिक और OCI कार्ड धारक करतारपुर साहिब के दर्शन करने जाएं लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि केवल सिख ही वहां पर दर्शन करने जा पाएंगे.

दूसरी तरफ भारत का पाकिस्तान से कहना है कि एक परिवार या फिर एक ग्रुप चाहे जितनी संख्या का हो उसको करतारपुर के दर्शन करने के लिए पाक इजाजत दे लेकिन पाक भारत की बात नहीं मान रहा है और कहा कि केवल और केवल 15 श्रद्धालुओं का ग्रुप ही एक बार में भारत से दर्शन करने आ सकता है. भारत को इस पर भी ऐतराज है.

परमिट के एवज में शुल्क

सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान परमिट के एवज में शुल्क वसूलना चाहता है लेकिन भारत कोई वीजा फीस नहीं चाहता. भारत जहां सातों दिन इस यात्रा को जारी रखना चाहता है तो पाकिस्तान का कहना है कि विशेष दिनों में ही यह यात्रा होनी चाहिए. भारत की तरफ से 4.2 किलोमीटर रोड बनाई जा रही है जबकि पाकिस्तान की तरफ से 4 किलोमीटर रोड बनाई जा रही है. इसके अलावा भारत सरकार ने इस यात्रा के दौरान खालिस्तान समर्थित गतिविधियों के बारे में अपनी चिंता जाहिर की है लेकिन पाकिस्तान की ओर से अभी तक इस मामले में कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया है.

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बता दें कि मोदी सरकार ने गुरु नानकदेव के 550वें प्रकाशोत्सव वर्ष पर डेरा बाबा नानक से लेकर अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक करतारपुर कॉरिडोर बनाने का फैसला लिया था. पिछले साल 26 नवंबर को गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक में भारत सरकार की तरफ से तो 28 नवंबर को पाकिस्तान में इस कॉरिडोर की नींव रखी गई थी. करतारपुर साहिब कॉरिडोर भारत के पंजाब राज्य के गुरदासपुर जिले में डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के करतारपुर साहिब गुरुद्वारे से जोड़ेगा. इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए सबसे पहले 14 नवंबर 2018 को भारत पाक के डेलिगेशन की मीटिंग हुई थी. उसके बाद इस साल 14 मार्च, 19 मार्च और 27 मई को टेक्निकल लेवल की बातचीत हो चुकी है.

करतारपुर साहिब शामिल नहीं

गृह मंत्रालय के सूत्रों ने आजतक को बताया कि पाकिस्तान के साथ 1974 में एक एमओयू हुआ था. इसमें भारत और पाक में स्थित दोनों देशों से जुड़े धार्मिक स्थानों को समझौा हुआ था. जिसमें 15 धार्मिक स्थान पाकिस्तान में थे, जहां भारत के श्रद्धालु जाकर दर्शन कर सकते हैं और 7 धार्मिक स्थान भारत में हैं जहां पाकिस्तान के श्रद्धालु आकर दर्शन सकते हैं. 1974 के दौरान हुए एमओयू में पाकिस्तान ने करतारपुर साहिब को शामिल नहीं किया था. भारत अब चाहता है कि दोनों देशों के बीच में एक MOU करतारपुर साहिब को लेकरहो जिससे भारत के श्रद्धालु अच्छे तरीके से पाकिस्तान जाकर दर्शन कर सकें.

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