न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया 'हाईजैक' नहीं की जा सकती: सीजेआई

न्यायपालिका और सरकार के बीच खींचतान के बीच भारत के प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया 'हाईजैक' नहीं की जा सकती और न्यायपालिका स्वतंत्र होनी चाहिए क्योंकि 'निरंकुश शासन' के दौरान उसकी अपनी एक भूमिका होती है.

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प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर

मोनिका शर्मा / BHASHA

  • नई दिल्ली,
  • 02 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 3:19 AM IST

न्यायपालिका और सरकार के बीच खींचतान के बीच भारत के प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने गुरुवार को कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया 'हाईजैक' नहीं की जा सकती और न्यायपालिका स्वतंत्र होनी चाहिए क्योंकि 'निरंकुश शासन' के दौरान उसकी अपनी एक भूमिका होती है. ठाकुर ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका न्यायाधीशों के चयन में कार्यपालिका पर निर्भर नहीं रह सकती.

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उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रशासन के मामलों में न्यायपालिका स्वतंत्र होनी चाहिए जिसमें अदालत के भीतर न्यायाधीशों को मामलों को सौंपना शामिल है, जब तक न्यायपालिका स्वतंत्र नहीं होगी, संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारी 'बेमतलब' होंगे.

प्रधान न्यायाधीश ठाकुर ने यह टिप्पणी यहां 'स्वतंत्र न्यायपालिका का गढ़' विषयक 37वें भीमसेन सचर स्मृति व्याख्यान के दौरान कही. यह टिप्पणी उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण है. देश के दोनों ही अंग एक-दूसरे पर न्यायाधीशों के रिक्त पद बढ़ाने के आरोप लगाने के साथ ही एक-दूसरे को 'लक्ष्मणरेखा' में रहने के लिए कह रहे हैं.

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