कोलकाता में बोले जेपी नड्डा- CAA पर जनता को गुमराह कर रहीं ममता बनर्जी

जेपी नड्डा ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम जिसके बारे में ममता दीदी और इनके सारे नेताओं ने देश में भ्रम फैलाने और प्रदेश को गुमराह करने की कोशिश की ह. ये अधिनियम नागरिकता देता है, किसी की नागरिकता लेता नहीं है.

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बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा (फाइल फोटोः पीटीआई) बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा (फाइल फोटोः पीटीआई)

मनोज्ञा लोइवाल

  • कोलकाता,
  • 23 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 8:14 PM IST

  • नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में निकाला मार्च
  • जेपी नड्डा ने नेहरू- लियाकत समझौते का भी किया जिक्र

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा कोलकाता में नागरिकता संशोधन अधिनियम के समर्थन में मार्च निकाला. इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम जिसके बारे में ममता दीदी और इनके सारे नेताओं ने देश में भ्रम फैलाने और प्रदेश को गुमराह करने की कोशिश की है.

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उन्होंने कहा कि यह अधिनियम नागरिकता देता है, किसी की नागरिकता लेता नहीं है. जेपी नड्डा ने कहा कि भारत में हमारे मुस्लिम भाई फलें, फूलें और आगे बढ़ें. कई चीफ जस्टिस बने, राष्ट्रपति बने, उपराष्ट्रपति बने, बड़े-बड़े पदों पर बैठे. हमने उनको बराबरी की नजर से देखा, उनको बराबरी का सम्मान दिया, आगे बढ़ने में हमने पूरी मदद दी.

बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि ममता बनर्जी वोट बैंक की राजनीति कर रही हैं. पीएम मोदी का लक्ष्य पड़ोसी देशों में प्रताड़ित किए जा रहे लोगों का भला करना है. हमारी रैली में लोगों की भीड़ से पता चलता है कि लोग नागरिकता संशोधन कानून पर सरकार के फैसले के साथ हैं. उन्होंने नेहरू- लियाकत समझौते का भी जिक्र किया और आजादी के समय देश विभाजन के कारण पनपी परिस्थियों का भी.

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जेपी नड्डा ने कहा कि विभाजन के समय कत्लेआम हुआ, नरसंहार हुआ, लाखों लोग मारे गए. इसके कारण लाखों लोग अपना घर छोड़कर, अपना वतन छोड़कर, अपना सबकुछ छोड़कर जान बचाने के लिए चल पड़े. उन्होंने कहा कि ऐसा इतिहास में कभी नहीं हुआ जब किसी देश से लाखों लोग दूसरे देश में गए हों. इन परिस्थितियों में जवाहरलाल नेहरू और लियाकत अली खान के बीच समझौता हुआ था जिसमें दोनों देशों ने अपने यहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली थी.

बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि दोनों देशों ने यह तय किया था कि अल्पसंख्यकों के जीवनयापन का खयाल रखेंगे. उन्होंने कहा कि इस समझौते में यह भी तय हुआ था कि दोनों देश अल्पसंख्यकों को आगे बढ़ने का अवसर देंगे, लेकिन रास्ते बदल गए. उन्होंने इतिहास और संविधान का जिक्र किया और कहा कि भारत ने तय कर लिया कि हम धर्मनिरपेक्ष देश रहेंगे. हमारे संविधान ने कह दिया, "वी द पीपुल ऑफ इंडिया डू रिजॉल्व टू हैव अ रिपब्लिक व्हिच विल बी सेक्यूलर इन नेचर."

गौरतलब है कि नड्डा का यह बयान ऐसे समय आया जब कांग्रेस के शीर्ष नेता महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर प्रदर्शन कर रहे हैं और वहां संविधान की प्रस्तावना पढ़ी जा रही है. बता दें कि विपक्ष नागरिकता संशोधन विधेयक को संविधान की मूल भावना के विपरीत बताते हुए इसके खिलाफ आंदोलन कर रहा है.

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