CAA पर बोले गृह मंत्री अमित शाह, नेहरू-लियाकत ने 1950 में जो तय किया वो 70 साल नहीं हुआ

1950 में दिल्ली में नेहरू और लियाकत अली खान के बीच एक समझौता हुआ. जिसमें दोनों देशों ने कहा कि वो अपने देश के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करेंगे. जब दोनों देशों ने यह तय किया उस दौरान आबादी क्या थी?

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अमित शाह, गृह मंत्री (फोटो- शेखर घोष, इंडिया टुडे) अमित शाह, गृह मंत्री (फोटो- शेखर घोष, इंडिया टुडे)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 8:29 AM IST

  • नेहरू-लियाकत अली समझौते का पाकिस्तान में पालन नहीं हुआ
  • यह हमारी जिम्मेदारी थी कि हम वहां के अल्पसंख्यकों को यहां शरण दें

देश के कई हिस्सों में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध हो रहा है. विरोधी इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बता रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि यह कानून धर्म विशेष के खिलाफ बनाया गया है. देश के नंबर वन न्यूज चैनल आजतक के 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण के दूसरे दिन गृह मंत्री अमित शाह ने तमाम सवालों के जवाब दिए. CAA के विरोध को लेकर गृह मंत्री ने कहा देश में 224 यूनिवर्सिटी है इनमें से 22 यूनिवर्सिटी में ही विरोध प्रदर्शन हुए हैं. बच्चों ने CAA को ठीक से पढ़ा नहीं है इसलिए विरोध कर रहे हैं. लोग जैसे-जैसे इसको समझेगें विरोध कम हो जाएगा.

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आज तक और इंडिया टुडे के न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल ने गृह मंत्री से पूछा कि CAA (नागरिकता संशोधन कानून) और NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) को जब साथ देखें तो सवाल खड़ा होता है कि मंशा क्या है?

इस सवाल के जवाब में अमित शाह ने कहा, 'इसको निर्वाचन क्षेत्र के साथ जोड़कर मत देखिए. इस मसले को समझने के लिए इतिहास में जाना होगा. इस देश का विभाजन कभी भी धर्म के आधार पर नहीं होना चाहिए था. लेकिन सच यही है कि देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ. कांग्रेस ने धर्म के बंटवारे को स्वीकार किया, इसी वजह से ऐसा हुआ. काफी हिंसा हुई, नागरिकों के साथ प्रताड़ना हुई. ढेर सारे लोग यहां से वहां गए और ढेर सारे शरणार्थी वहां से यहां आए. हालांकि उसके बाद भी मुसलमान यहां पर रहे, उन्हें रहना भी चाहिए. क्योंकि हमने कहा था कि हम सेक्युलर देश हैं. वो यहां रहे उनका स्वागत है.'

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गृह मंत्री अमित शाह ने आगे बताया, 'बहुत सारे हिंदू, बौद्ध, जैन वहां भी रह गए. तो उनकी चिंता थी कि भविष्य में उनका क्या होगा? 1950 में दिल्ली में नेहरू और लियाकत अली खान के बीच एक समझौता हुआ. जिसमें दोनों देशों ने कहा कि वो अपने देश के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करेंगे. जब दोनों देशों ने यह तय किया उस दौरान आबादी क्या थी? अभी के पाकिस्तान (बांग्लादेश से अलग) में लगभग 23 प्रतिशत हिंदू थे. अभी के बांग्लादेश में 30 प्रतिशत हिंदू थे, तब उसे पूर्वी पाकिस्तान कहते थे. आज पाकिस्तान में तीन प्रतिशत हिंदू हैं. कहां गए वे लोग? जबरन धर्म परिवर्तन करा दिया गया या वो अपना धर्म बचाने के लिए यहां आ गए. मैंने संसद में भी ये मुद्दा उठाया था. कहां जाएंगे वो, यहीं तो आएंगे.'

गृह मंत्री ने आगे कहा, 'जब नेहरू-लियाकत अली समझौते का पाकिस्तान में पालन नहीं हुआ तब यह हमारी जिम्मेदारी थी कि हम वहां के अल्पसंख्यकों को यहां शरण दें. कांग्रेस ने 70 साल तक इन लोगों को नर्क की जिंदगी जीने के लिए मजबूर किया. अपनी वोट बैंक के लिए उन्हें मजबूर किया गया. नरेंद्र मोदी जी नागरिकता कानून लेकर आए, अब वो भी सम्मान के साथ जी पाएंगे. अपनी बच्चियों की रक्षा कर पाएंगे, अपने धार्मिक विश्वास के साथ जी पाएंगे. इसीलिए पीएम यह कानून लेकर आए. जैसा कि हमने वादा भी किया था.'

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