बैंक फ्रॉड और साइबर क्राइम को रोकने के लिए राज्यों में बनेंगे 'इंटीग्रेटेड फॉरेंसिक लैब'

आपको बता दें कि साइबर क्राइम के चलते सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया की इस वक्त नींद उड़ी हुई है. इसके बढ़ते संकट का अंदाजा इस बात से हम लगा सकते हैं कि साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए हाल में दिल्ली में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में 124 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे

प्रतीकात्मक तस्वीर
कौशलेन्द्र बिक्रम सिंह/जितेंद्र बहादुर सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 29 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 3:36 PM IST

हाल ही में साइबर फ्रॉड और साइबर क्राइम को रोकने के लिए गृह मंत्रालय की तरफ से गठित साइबर एंड इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ब्रांच अब साइबर क्राइम को रोकने के लिए बड़े कदम उठाने की तैयारी में है. गृह मंत्रालय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस विंग के जरिए राज्यों से यह कहा जाएगा कि वह अपने-अपने राज्यों की राजधानी और महत्वपूर्ण स्थानों पर साइबर क्राइम और बैंक फ्रॉड की जांच को बेहतर करने के लिए 'फॉरेंसिक लैब' बनाएं.

सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में गृह मंत्रालय इसके लिए राज्यों को लिखेगा कि बैंक फ्रॉड और साइबर क्राइम के चलते आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उनकी गाढ़ी कमाई एक झटके में साइबर फ्रॉड के जरिए चली जाती है. इसलिए सभी राज्य साइबर क्राइम की फॉरेंसिक जांच और उसके टेक्निकल बिंदुओं पर नजर रखने और जानकारी करने के लिए अपने-अपने राज्यों में फॉरेंसिक लैब बनाएं और साइबर एक्सपर्ट के तौर पर लैब टेक्नीशियन को भी रखें.

आपको बता दें कि साइबर क्राइम के चलते सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया की इस वक्त नींद उड़ी हुई है. इसके बढ़ते संकट का अंदाजा इस बात से हम लगा सकते हैं कि साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए हाल में दिल्ली में आयोजित वैश्विक सम्मेलन में 124 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे. जिस तरीके से इंटरनेट यूजर्स की लगातार संख्या बढ़ रही है उसी क्रम से दुनिया भर में साइबर क्राइम के खतरे भी बढ़ रहे हैं. लोगों के पर्सनल अकाउंट को हैक करने से लेकर साइबर स्टॉकिंग, साइबर टेररिज्म जैसी घटनाएं अब आम हो गई हैं. इन तमाम खतरों से बैंकों, मल्टीनेशनल कंपनियों के कामकाज भी प्रभावित होते हैं. यही नहीं भारत की आम जनता जो अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा बैंकों में रखता है उसका पैसा भी साइबर क्राइम और साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाता है. जिस पर नजर रखना और ऐसे फ्रॉड से बचाने के लिए गृह मंत्रालय बड़ा कदम उठा रहा है.

जानकारी के मुताबिक पूरे विश्व स्तर पर साइबर हमले से करीब सवा तीन लाख से ज्यादा कंप्यूटर इस साल प्रभावित हुए हैं. जैसे-जैसे लोगों की दिनचर्या और उनके काम बदल रहे हैं वैसे-वैसे इस तरीके के फ्रॉड भी बढ़ते जा रहे हैं. लोगों के हाथों में स्मार्टफोन है, कंप्यूटर हैं, लैपटॉप हैं जिस पर वह अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल हर बात शेयर करने में लगे हैं जिसका फायदा हैकिंग करने वाले लोग उठा रहे हैं.

केंद्र सरकार भी इन तमाम चीजों को लेकर काफी चिंतित है. और इसी के चलते उसने साइबर क्राइम को कंट्रोल करने के लिए एक अलग डिपार्टमेंट ही गठित कर दिया है. हालांकि अभी इस डिपार्टमेंट ने अपना काम शुरू ही किया है पर जल्द ही इस डिपार्टमेंट के जरिए बहुत बड़े स्तर पर इस तरीके के साइबर फ्रॉड और साइबर क्राइम पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम भी गठित किया जाएगा. जहां से हर दिन आने वाले साइबर फ्रॉड को निपटाने के लिए काम किया जाएगा.

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