मोदी सरकार ने पिछले दो वर्षों के बीच चीन से आयात कम किए हैं. सरकार ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है. सरकार से सवाल हुआ था कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए क्या सरकार चीन के उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा तो फिर इसका ब्यौरा क्या है. सांसद भगवंत खुबा ने यह भी पूछा था कि मौजूदा समय देश में चीन निर्मित उत्पादों के व्यापार के क्या आंकड़े हैं.
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में जवाब देते हुए बताया कि सरकार ने एमएसएमई के विकास के लिए कई अहम कदम उठाए हैं. इसमें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), पारंपरिक उद्योगों के पुनरुद्धार के लिए निधि योजना (स्फूर्ति), नवोन्मेष, ग्रामीण उद्योग एवं उद्यमिता संवर्धन योजना, क्रेडिट लिंक्ड कैबिटल, सूक्ष्म और लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम शामिल हैं.
चाइनीज उत्पादों के मसले पर जवाब देते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि भारत में जब किसी वस्तु की बड़ी मात्रा में आयात होने से घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचने की आशंका होती है तो फिर समय-समय पर डंपिंग रोधी शुल्क, प्रतिकारी शुल्क और अन्य तरह के टैक्स लगाए जाते हैं. नितिन गडकरी ने बताया कि वाणिज्यिक आसूचना एवं सांख्यिकी महानिदेशालय से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार भारत में चीनी उत्पादों के आयात का मूल्य जहां वर्ष 2017-18 में 76380.70 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, वहीं वर्ष 2018-19 में 70319.55 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया. इस प्रकार देखें तो 6061.15 मिलियन डॉलर की आयात में कमी आई. माना जा रहा है कि आयात में यह कमी घरेलू उद्यमों को संरक्षण देने की दिशा में उठाए गए कदम के तहत आई है.
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नवनीत मिश्रा