चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले दोनों देशों के बीच में जम्मू-कश्मीर के मसले को लेकर विवाद हुआ. चीन ने जम्मू-कश्मीर के मसले को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के हिसाब से सुलझाने को कहा तो भारत ने जवाब दिया कि कोई दूसरा देश इस मसले पर ना बोले. अब शी जिनपिंग के भारत आने से ठीक पहले भारत में चीन के एंबेसडर सुन वेंगदोंग ने कहा है कि भारत और चीन कभी भी एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं हैं, दोनों देश क्षेत्र की एकता के लिए ताकतवर शक्ति हैं.
समाचार एजेंसी PTI से बात करते हुए सुन वेंगदोंग ने कहा कि भारत-चीन के बीच विकास के मुद्दे पर सिद्धांतों के नए सेट पर आगे बढ़ने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि चीन और भारत दुनिया के दो बड़े विकासशील देश हैं, ऐसे में दोनों की दोस्ती पर दुनिया की प्रगति भी निर्भर करती है.
चीनी एंबेसडर ने कहा कि शुक्रवार-शनिवार को होने वाली नरेंद्र मोदी-शी जिनपिंग के बीच समिट से दोनों देशों के बीच की दोस्ती बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि चीन-भारत कभी भी एक दूसरे के लिए खतरा नहीं बन सकते हैं, दोनों का साथ चलना कई देशों के लिए सार्थक साबित हो सकता है.
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जम्मू-कश्मीर पर विवाद के बाद बयान
बता दें कि चीनी राजदूत का ये बयान दोनों देशों के बीच जम्मू-कश्मीर के मसले पर गर्माए माहौल के बाद आया है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के चीन दौरे के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान दिया था कि भारत-पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर का मसला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के हिसाब से सुलझाना चाहिए. दोनों देश इसपर बात करें.
भारत ने क्या दिया था जवाब?
चीन के इसी बयान पर भारत भड़क गया था और साफ कहा था कि जम्मू-कश्मीर का मसला भारत का आंतरिक मामला है, ऐसे में कोई अन्य देश इस पर टिप्पणी ना करें. भारत इससे पहले भी कई बार जम्मू-कश्मीर के मसले पर अपना रुख स्पष्ट कर चुका है और शुरू से उसी पर टिका है. UN चार्टर पर दिए गए बयान से पहले चीन ने भारत-पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर के मसले को आपस में बात कर सुलझाने की बात कही थी.
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