गुजरात चुनाव में AAP की कांग्रेस को अंदरखाने मदद की रणनीति!

दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह गुजरात में बीजेपी के खिलाफ पड़ने वाले वोटों को काटने के लिए नहीं बल्कि बीजेपी को हराने के लिए चुनावी समर में उतरेंगे.

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गुजरात में बीजेपी से टक्कर लेने उतरेगी आप गुजरात में बीजेपी से टक्कर लेने उतरेगी आप

प्रज्ञा बाजपेयी / खुशदीप सहगल / आशुतोष मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 17 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 3:27 PM IST

क्या आम आदमी पार्टी (AAP) गुजरात चुनाव में बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस को अंदरखाने मदद करने की रणनीति पर काम कर रही है? पार्टी के गुजरात प्रभारी गोपाल राय का वैसे तो कहना है कि AAP राज्य में वोट काटने के लिए नहीं बल्कि बदलाव के लिए चुनाव लड़ेगी लेकिन साथ ही वे कहते हैं कि जहां पार्टी के मजबूत उम्मीदवार नहीं होंगे वहां बीजेपी के खिलाफ सबसे सशक्त उम्मीदवार को जिताने के लिए जोर लगाया जाएगा. ‘आज तक’ से बातचीत में गोपाल राय ने साफ कहा कि AAP को कांग्रेस के स्वच्छ छवि वाले चेहरों को समर्थन देने से भी परहेज नहीं होगा. 

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गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पहली बार मैदान में उतर रही AAP ने तय किया है कि वह सभी सीटों पर नहीं बल्कि राज्य की उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़ेगी जहां पर पार्टी का संगठन बूथ स्तर तक मौजूद और मजबूत होगा.

बीजेपी को हराने के लिए उतरेंगे चुनाव में

दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने दो टूक कहा कि वह गुजरात में बीजेपी के खिलाफ पड़ने वाले वोटों को काटने के लिए नहीं बल्कि बीजेपी को हराने के लिए चुनावी समर में उतरेंगे. गोपाल राय का कहना है कि जिन सीटों पर आम आदमी पार्टी की स्थिति बेहतर नहीं है और जहां पर उसे बूथ स्तर तक संगठन हासिल नहीं है वहां पर वह अपने उम्मीदवार उतार कर बीजेपी के खिलाफ पडने वाले वोटों का बंटवारा नहीं करना चाहती. ऐसी सीटों पर AAP बीजेपी के खिलाफ जो भी मजबूत उम्मीदवार होगा उसका समर्थन और मदद करेगी. चाहे ये उम्मीदवार निर्दलीय हों या फिर किसी और पार्टी से ताल्लुक रखते हों.

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कांग्रेस की मदद करना चाहती है 'आप'?

गोपाल राय से जब पूछा गया कि यह संकेत देकर पार्टी गुजरात में सीधे सीधे कांग्रेस की मदद करना तो नहीं चाह रही? इस सवाल पर गोपाल राय ने कहा, "गुजरात का चुनाव BJP बनाम गुजरात की जनता है. कांग्रेस अपने बलबूते गुजरात विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकती. गुजरात की जनता बीजेपी को हराने के लिए खड़ी है और वह हर उस उम्मीदवार को जिताएगी जो बीजेपी उम्मीदवार को मजबूती से चुनौती देता नजर आएगा. 

ऐसे में जिन विधानसभा सीटों पर AAP की स्थिति मजबूत होगी वहां गुजरात की जनता हमारे उम्मीदवारों को जिताएगी. जहां पर निर्दलीय अथवा दूसरी पार्टी के स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवार मजबूत स्थिति में होंगें AAP उनकी मदद करेगी. पार्टी ऐसी सीटों पर वोट काटकर हरगिज फायदा नहीं पहुंचाएगी."

 

चुनाव नहीं लड़ने से आप को होगा दोहरा नुकसान

AAP से जुड़े सूत्रों का कहना है कि गुजरात विधानसभा चुनाव लड़ना पार्टी की मजबूरी भी है क्योंकि बिना चुनाव लड़े राज्य में संगठन का फैलाव होना मुश्किल है और चुनाव न लड़ने से पिछले 3 सालों में बनाए गए संगठन को नुकसान हो सकता है. इसलिए आम आदमी पार्टी गुजरात में एक तीर से दो निशाना साधने की कोशिश कर रही है. पहली कोशिश है कि चुनाव लड़ कर दूसरे राज्यों में उसका विस्तार बड़े और संगठन मजबूत हो साथ ही दूसरी कोशिश यह भी है कि बीजेपी के खिलाफ वोटों का बंटवारा करने की बजाए जीत की संभावना वाले दूसरे उम्मीदवारों की मदद की जाए.

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ऐसे में साफ है कि बीजेपी ये आरोप अपने सिर नहीं लेना चाहती कि उसने गुजरात में वोट काट कर बीजेपी की मदद की.  पार्टी की गुजरात इकाई हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवानी जैसे पाटीदार नेताओं और दलित एक्टिविस्टों के संपर्क में भी है.

किसी से भी गठबंधन नहीं करेगी आप

AAP ने गुजरात में चुनाव से पूर्व किसी भी तरह के गठबंधन की संभावना से साफ इनकार किया है. गोपाल राय ने दिवाली के बाद अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करने का संकेत दिया. गोपाल राय के मुताबिक गुजरात की लगभग 150 विधानसभा सीटों पर पार्टी ने फोकस किया है. सूत्रों के मुताबिक गुजरात में AAP की चुनाव समिति ने उम्मीदवारों की एक लिस्ट पार्टी की पीएसी को भेजी है जिस पर आखिरी मुहर पार्टी की सर्वोच्च इकाई (पीएसी) की ओर से दिवाली के बाद लगेगी.  हालांकि कितनी सीटों पर आम आदमी पार्टी गुजरात में चुनाव लड़ेगी इसका खुलासा पार्टी अभी नहीं कर रही है लेकिन गोपाल राय की माने तो उन तमाम सीटों पर बीजेपी को टक्कर देंगे जहां पार्टी का संगठन बूथ स्तर तक मजबूत होगा और जहां पर वे बीजेपी को हराने की क्षमता रखते होंगे. 

क्या केजरीवाल गुजरात में प्रचार करेंगे?

क्या अरविंद केजरीवाल गुजरात में पार्टी के लिए प्रचार करेंगे? इस सवाल का गोपाल राय ने कोई साफ जवाब नहीं दिया.  उनका कहना है कि केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री होने के नाते फिलहाल दिल्ली पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो कि पार्टी की पहली जिम्मेदारी है. ऐसे में जब दूसरे राज्यों में पार्टी को उनकी जरूरत होगी तो उन्हें प्रचार के लिए जरूर आग्रह किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल 5 नवंबर को भोपाल में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होंगे और सूत्रों की माने तो इसी तारीख को केजरीवाल मध्यप्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का बिगुल भी बजाएंगे.

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गोपाल राय का कहना है कि आम आदमी पार्टी अंधाधुंध चुनाव में लड़ने की बजाय उन राज्यों में चुनाव लड़ेगी जहां पर वह संगठन बनाने की क्षमता रखती होगी और जहां पार्टी के चुनाव जीतने की उम्मीद दिख रही हो. गोपाल राय के मुताबिक पार्टी दूसरे राज्यों में संगठन स्तर पर काम कर रही है और संगठन की मजबूती की समीक्षा के बाद एक विस्तृत रोडमैप तैयार करके उन राज्यों में मजबूती के साथ चुनाव लड़ा जाएगा.

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