जीएसटी लागू होने के बाद बहुत से लोगों को इस बात की चिंता है कि जिन चीजों पर जीएसटी कम हुई है, उसका फायदा ग्राहकों को मिलेगा भी या नहीं. इसकी वजह यह है कि खाने-पीने समेत तमाम पैकेज्ड चीजों का बहुत सारा स्टॉक बाजार में पहले से मौजूद है और जिन पर जीएसटी लागू होने से पहले की MRP छपी हुई है.
नई एमआरपी का स्टीकर लगाना जरूरी
जिन चीजों पर टैक्स कम हुआ है नियमों के मुताबिक उनकी कीमत कम होनी चाहिए. खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान के मंत्रालय ने इसको लेकर निर्देश जारी किए हैं जिसमें कहा गया है कि कंपनियों और दुकानदारों को जीएसटी के बाद कीमतों में जो बदलाव हुआ है उसके लिए नई MRP का स्टीकर लगाना जरूरी है.
शुरू होगा ग्राहक हेल्पलाइन नंबर
गुरुवार को ने 'आज तक' से खास बातचीत में बताया कि उनका मंत्रालय इस बात की निगरानी कर रहा है कि जिन चीजों पर टैक्स कम हुआ है, उसकी कीमत कम हो और फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचे. उन्होंने कहा कि उनका मंत्रालय बहुत जल्दी एक हेल्प लाइन शुरू करने जा रहा है जहां ग्राहक इस बात की शिकायत कर सकते हैं कि जीएसटी कम होने के बाद किसी भी चीज पर कीमत कम नहीं की गई. पासवान ने कहा कि ऐसी सारी शिकायतों पर कार्रवाई की जाएगी.
कंपनियों को 1 सितंबर तक स्टीकर लगाने की छूट
उपभोक्ता मंत्रालय ने नई MRP के बारे में जो निर्देश दिए हैं, उसमें कहा गया है कि अगर किसी भी चीज पर कम हुआ है तो नई कम कीमत के साथ एमआरपी का दूसरा स्टीकर चिपकाया जाए ताकि ग्राहकों को साफ-साफ पता चल सके की कीमतें कम हुई हैं. लेकिन अगर किसी चीज की कीमत में बढ़ोतरी हुई है, तो कंपनियों को दो अखबारों में इश्तेहार छापकर बताना होगा कि इन चीजों पर जीएसटी बढ़ने से इनकी कीमत बढ़ गई हैं. कंपनियों को पुराना माल बेचने के लिए स्टीकर लगाने की छूट 1 सितंबर तक मिलेगी. उसके बाद सभी सामानों पर जीएसटी के हिसाब से नई कीमत की एमआरपी छापनी होगी.
एक ही चीज के लिए अलग MRP बंद करने की तैयारी
ने एक ही चीज के लिए अलग-अलग MRP पूरी तरह बंद करने के लिए भी और कदम उठाए हैं. कई बार ऐसी शिकायतें मिलती हैं कि एयरपोर्ट, सिनेमाघर और मॉल जैसी जगह पर खासतौर पर ज्यादा MRP छपी हुई चीजें बेची जाती हैं. नियमों के मुताबिक ऐसा करना पहले भी गलत था लेकिन अब इसको लेकर मंत्रालय ने स्पष्ट नियम बना दिए हैं, जिसे अगले साल 1 जनवरी से लागू कर दिया जाएगा.
सुरभि गुप्ता / बालकृष्ण