कोरोना संकट के बीच केंद्र सरकार ने पीपीई मेडिकल के निर्यात पर पाबंदी को खत्म कर दिया है. सरकार ने पीपीई के निर्यात की अनुमति दे दी है. हालांकि सरकार ने पीपीई के निर्यात पर सालाना 50 लाख पीस का कैप लगा रखा है. दूसरा ये कि सरकार ने पीपीई की अन्य सामाग्रियों के निर्यात पर रोक जारी रखी है.
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इससे पहले सरकार ने 12 जरूरी दवाओं और 12 एक्टिव फार्मास्यूटिकल इनग्रेडिएंट (API) के निर्यात पर लगी रोक हटा दी थी. उस दौरान जिन दवाओं के निर्यात पर बैन हटाया गया है उनमें टिनिडाजोल, मेट्रानिडाजोल, एसिक्लोविर, विटामिन बी1, विटामिन बी6, विटामिन बी 12, क्लोरमफेनिकॉल शामिल हैं.
व्यापार महानिदेशालय द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार सरकार ने विटामिन बी1 और बी12 सहित 24 फार्मा सामग्रियों (API) और दवाओं पर निर्यात प्रतिबंधों में ढील दे दी. अधिसूचना के अनुसार पैरासीटामॉल और पैरासीटामॉल से बनी अन्य दवाइयों पर निर्यात प्रतिबंध पहले की तरह जारी रहेंगे.
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विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने तीन मार्च को 26 दवा सामग्रियों (एपीआई) और उनके यौगिक दवाइयों के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था जिसके तहत निर्यातक को निर्यात के लिए डीजीएफटी से लाइसेंस या अनुमति लेनी होती है. कुछ फार्मा कंपनियों द्वारा इन प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताए जाने के बीच अब 24 एपीआई और इनके यौगिक दवाओं का निर्यात आसान हो गया है.
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इन दवाओं का उत्पादन काफी हद तक चीन से आने वाले कच्चे माल पर निर्भर था. जब कोरोना की वजह से चीन में फैक्टरियां बंद हो गईं और एक्टिव ग्रेडिएंट यानी कच्चा माल आना बंद हो गया तो इनके निर्यात पर रोक लगा दी गई ताकि देश में इनकी किल्लत न हो.
राहुल श्रीवास्तव