ED की हिरासत में आम्रपाली के दो प्रमोटर, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में होगी पूछताछ

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आम्रपाली के प्रमोटर अनिल शर्मा और शिव प्रिया को हिरासत में लिया है. अब ईडी आम्रपाली के दोनों प्रमोटरों से लखनऊ में पूछताछ करेगी. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को आम्रपाली के प्रमोटरों को हिरासत में लेने और घर खरीदारों की गाढ़ी कमाई के पैसों को डायवर्ट करने की जांच करने को कहा था.

(प्रतीकात्मक तस्वीर)
मुनीष पांडे
  • लखनऊ,
  • 18 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 6:33 PM IST

  • आम्रपाली प्रमोटर अनिल शर्मा, शिव प्रिया को ईडी ने हिरासत में लिया
  • अनिल शर्मा और शिव प्रिया से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में होगी पूछताछ

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आम्रपाली के प्रमोटर अनिल शर्मा और शिव प्रिया को हिरासत में लिया है. अब ईडी आम्रपाली के दोनों प्रमोटरों से लखनऊ में पूछताछ करेगी. हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को आम्रपाली के प्रमोटरों को हिरासत में लेने और घर खरीदारों की गाढ़ी कमाई के पैसों को डायवर्ट करने की जांच करने को कहा था.

सुप्रीम कोर्ट ने पता लगाने के लिए कहा था

सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्रीय जांच एजेंसी से प्रमोटरों की कस्टोडियल रिमांड लेने के लिए कहा था ताकि यह पता लगाया जा सके कि होम बायर्स का पैसा फाइनेंस डायरेक्टर्स और प्रमोटरों की भव्य जीवन शैली के लिए कैसे डायवर्ट किया गया.

13 जनवरी को मिली थी सुप्रीम कोर्ट से इजाजत

सुप्रीम कोर्ट में 13 जनवरी को आम्रपाली मामले को लेकर सुनवाई हुई थी. उस दौरान कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को आम्रपाली ग्रुप के डायरेक्टर की कस्टडी लेने की इजाजत दे दी थी. इसके बाद ईडी शिव प्रिया, अनिल शर्मा और अजय कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिए स्वतंत्र हो ग थी. सर्वोच्च अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में पूछताछ करने के लिए ईडी को इजाजत दी थी. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने NBCC को कंस्ट्रक्शन काम में तेजी लाने को कहा थी. मामले की अगली सुनवाई अब 17 फरवरी को होगी.

आम्रपाली के निदेशकों को हिरासत में लेने की ED को इजाजत

जेपी मॉर्गन की भूमिका पर भी सख्त हुई थी सुप्रीम कोर्ट

इससे पहले दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली मामले में जेपी मॉर्गन की भूमिका को लेकर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया था. शीर्ष कोर्ट ने आम्रपाली मामले में निर्देश दिया था कि ईडी जेपी मॉर्गन की भूमिका को लेकर तीन महीने में जांच पूरा करे. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि जेपी मॉर्गन ने फेमा और एफडीआई मानदंडों का उल्लंघन करके आम्रपाली में निवेश किया. साथ ही निवेशकों का पैसा डायवर्ट करने में मदद की.

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