एक शहंशाह की मोहब्बत की निशानी सफेद संगमरमर से बनी दुनिया की बेहद खूबसूरत इमारत ताजमहल अपने आप में इतिहास और मोहब्बत का एक हसीन अफसाना समेटे है. यही वजह है कि दुनिया में कहीं से कोई खासो आम अगर भारत आता है, तो वो ताज के दीदार के बगैर रह नहीं पाता.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी भारत के अपने पहले दौरे पर आ रहे हैं, तो वो भी ताजमहल के दीदार का मोह छोड़ नहीं पाए. उनसे पहले अमेरिका के दो और राष्ट्रपति भी भारत आकर ताज का दीदार कर चुके हैं.
दिसंबर 1959 में अमेरिकी राष्ट्रपति डी आइजनहावर ने भारत दौरे के दौरान ताज का दीदार किया था. उसके बाद साल 22 मार्च 2000 को अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भारत दौरे पर आए तो आगरा में ताजमहल के दीदार का मोह छोड़ नहीं पाए. उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री थे. बिल क्लिंटन अपनी बेटी चेलेसा क्लिंटन के साथ ताजनगरी पहुंचे थे. ताज का रूप देखकर बिल क्लिंटन मुग्ध हो गए थे.
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वहीं, बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति रहते उनकी पत्नी और तब अमेरिका की प्रथम नागरिक हिलेरी क्लिंटन 1995 में आगरा आ चुकी थीं. 30 मार्च 1995 को हिलेरी क्लिंटन ने अपनी बेटी चेलेसा के साथ ताज का दीदार किया था.
इन देशों के राष्ट्रपति घूम चुके हैं ताज
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी पत्नी के साथ 4 अक्टूबर 2000 को आगरा आए थे और ताजमहल घूमने गए थे. वहीं, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने तो भारत के साथ बातचीत के लिए खास तौर पर आगरा को चुना था. हालांकि, मुशर्रफ ने अटल बिहारी वाजपेयी के साथ एक तरह से धोखा किया था, लेकिन अपनी बेगम के साथ ताजमहल के दीदार का मुशर्रफ ने जो सपना देखा था, वो जरूर पूरा हो गया.
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वहीं, ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो हों या फ्रांस के राष्ट्रपति मार्कोन, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो हों या इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू. इनके अलावा चीन, जापान, मालदीव के भी राष्ट्राध्यक्ष जब भारत आए तो ताजमहल का दीदार करने आगरा जरूर आए.
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