SC के फैसले का तमिल में नहीं होगा अनुवाद, डीएमके ने जताई निराशा

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और आदेशों को अंग्रेजी के अलावा हिंदी, असमिया, कन्नड़, मराठी, उड़िया और तेलुगु में जारी करने का निर्णय किया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और आदेश तमिल भाषा में उपलब्ध नहीं होंगे, जिस पर डीएमके ने निराशा जताई है.

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एमके स्टालिन (Courtesy- ANI) एमके स्टालिन (Courtesy- ANI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 6:21 PM IST

सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों को अंग्रेजी के अलावा पांच क्षेत्रीय भाषाओं में जारी करने के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के फैसले का डीएमके ने स्वागत किया है, लेकिन इनमें तमिल भाषा को शामिल नहीं करने पर निराशा जताई है. आपको बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और आदेशों को अंग्रेजी के अलावा हिंदी, असमिया, कन्नड़, मराठी, उड़िया और तेलुगु में जारी करने का निर्णय लिया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और आदेश तमिल भाषा में उपलब्ध नहीं होंगे.

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इस पर डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने निराशा जारी की है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को अंग्रेजी भाषा के अलावा पांच क्षेत्रीय भाषाओं में जारी किए जाने का हम तहेदिल से स्वागत करते हैं, लेकिन तमिल भाषा को इसमें शामिल नहीं किया जाना बेहद निराशाजनक है.

उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने शीर्ष अदालत के फैसलों का अनुवाद पांच क्षेत्रीय भाषाओं में करने और उनको सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट में अपलोड कराने का फैसला लिया है. हम इसको भारतीय न्यायिक व्यवस्था में मील का पत्थर मानते हैं. इससे वादियों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को समझने और उसके पालन करने में किसी भी तरह का कन्फ्यूजन नहीं होगा.

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और फैसलों की प्रति जल्द ही अंग्रेजी के साथ ही 5 क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध होगी. हालांकि ये फैसले और आदेश तमिल में उपलब्ध नहीं होंगे. एमके स्टालिन ने कहा कि भारतीय संविधान की अनुसूची 8 में तमिल भाषा को आधिकारिक भाषा माना गया है. उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और आदेशों का तमिल भाषा में अनुवाद होता है, तो इससे तमिलनाडु के लोगों को भी फायदा होगा.

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डीएमके ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से अपील की कि इस क्षेत्रीय भाषा की सूची में तमिल भाषा को भी शामिल करने पर विचार करें, ताकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले तमिल भाषा में भी उपलब्ध हो सकें.

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