दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में 2 याचिका लगाई गई हैं, जिस पर शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है. अब इस मामले में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद, पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला समेत तीन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जी दाखिल की है.
भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने अपनी अर्जी में शाहीन बाग में धरने के खिलाफ दाखिल याचिकाओं में पक्षकार बनाने की मांग की है. इस याचिका में कहा गया कि केंद्र सरकार इस मामले में कोर्ट को अपने नजरिए से जानकारी देकर गुमराह कर सकती है. लिहाजा इस केस के सभी तथ्यों की जानकारी देने के लिए उनको पक्षकार बनाया जाए.
भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर ने अपनी अर्जी में कहा कि शाहीन बाग में शांतिपूर्वक चल रहा धरना देश के अन्य स्थानों पर भी मिसाल बन चुका है. चंद्रशेखर आजाद ने अपनी अर्जी में कहा कि शाहीन बाग के धरना प्रदर्शन के खिलाफ याचिका दाखिल करने वाले सुप्रीम कोर्ट से ऐसा आदेश चाहते हैं, जिससे दिल्ली पुलिस महिलाओं पर बल प्रयोग करके जगह खाली करा दे.
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इससे पहले शाहीन बाग मामले में दो याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा. इस मामले में शीर्ष अदालत इस मामले में 17 फरवरी को सुनवाई करेगा. सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनिश्चितकाल तक सार्वजनिक सड़क को अवरुद्ध नहीं किया जा सकता है. इस तरह सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन जारी नहीं रखा जा सकता है. जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के. एम. जोसेफ की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है.
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जस्टिस संजय किशन कौल ने सुनवाई के दौरान कहा कि शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन को कई दिन हो चुका है. विरोध प्रदर्शन के लिए एक तय स्थान होना चाहिए. अगर सार्वजनिक जगह पर अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन की इजाजत दी गई, तो हर कोई हर जगह प्रदर्शन करने लगेगा. शीर्ष अदालत ने कहा कि विरोध प्रदर्शन नागरिकों के हितों की कीमतों पर नहीं किए जा सकते.
संजय शर्मा / अनीषा माथुर