चंद्रयान-2 की आज दोपहर 2.43 बजे लॉन्चिंग, श्रीहरिकोटा में तैयारी पूरी

चांद पर जाने वाले भारत के चंद्रयान-2 का काउंटडाउन शुरू हो गया है. इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के चीफ के सिवन ने इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा कि चंद्रमा पर भेजे जाने वाले भारत के दूसरे यान की रविवार शाम को उल्टी गिनती 6.43 बजे से शुरू हो गई. पहले चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था.

चंद्रयान 2 को कल लॉन्च किया जाएगा
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 8:34 AM IST

  • चंद्रयान-2 की उल्टी गिनती रविवार शाम 6.43 से शुरू हो गई है
  • 22 जुलाई को दोपहर 2.43 बजे इसे लॉन्च किया जाएगा
  • श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से इसे छोड़ा जाएगा
  • इस रॉकेट की लंबाई 44 मीटर लंबा और वजन 640 टन है.

चांद पर जाने वाले भारत के चंद्रयान-2 का काउंटडाउन शुरू हो गया है. इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के चीफ के सिवन ने इसकी पुष्टि की. उन्होंने कहा कि चंद्रमा पर भेजे जाने वाले भारत के दूसरे यान की रविवार शाम को उल्टी गिनती 6.43 बजे से शुरू हो गई. पहले चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को लॉन्च किया जाना था. चंद्रयान में लिक्विड कोर स्टेज पर ईंधन भरने का काम पूरा हो गया है.

लेकिन लॉन्चिंग से एक घंटे पहले इसमें तकनीकी खराबी का पता चलने के बाद इसे रोक दिया गया. अब 22 जुलाई को दोपहर 2.43 बजे इसे लॉन्च किया जाएगा. इसरो ने बताया कि जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (जीएसएलवी मार्क-3) में आई तकनीकी खराबी को ठीक कर लिया गया है.

चंद्रयान-2 भारत का दूसरा सबसे महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन है. इसे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से भारी-भरकम रॉकेट जियोसिन्क्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-मार्क 3 (जीएसएलवी एमके 3) से लॉन्च किया जाएगा. जीएसएलवी को 'बाहुबली' के नाम से भी पुकारा जाता है. यह रॉकेट 44 मीटर लंबा और 640 टन वजनी है. इसमें 3.8 टन का चंद्रयान रखा गया है.

पृथ्वी और चांद की दूसरी करीब 3.844 किलोमीटर है. उड़ान के कुछ ही मिनटों बाद 375 करोड़ रुपये का जीएसएलवी-मार्क-3 रॉकेट 603 करोड़ रुपये के चंद्रयान-2 को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करेगा. वहां के चांद की यात्रा शुरू होगी. चंद्रयान-2 में लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चांद तक जाएंगे. लैंडर विक्रम सितंबर या अक्टूबर में चांद पर पहुंचेगा और इसके बाद वहां प्रज्ञान काम शुरू करेगा.

उल्टी गिनती के दौरान रॉकेट और अंतरिक्ष यान की प्रणालियां जांच से गुजरेंगी और रॉकेट इंजनों में ईंधन भरा जाएगा. अब तक इसरो ने 3 जीएसएलवी-एमके 3 रॉकेट भेजे हैं. पहला रॉकेट 18 दिसंबर 2014 को, दूसरा 5 फरवरी 2017 को और तीसरा 14 नवंबर 2018 को भेजा गया. जीएसएलवी-एमके 3 का इस्तेमाल भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए किया जाएगा, जो वर्ष 2022 के लिए तय है.

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