केरल मॉडल और कोरोना की दूसरी लहर की चुनौतियां

भारत में सबसे पहले कोरोनावायरस के कुछ केस केरल से ही रिपोर्ट हुए थे. इसके बावजूद इस राज्य ने मई तक सफलतापूर्वक वक्र को समतल कर दिया था जबकि अन्य राज्यों में केस तेजी से बढ़ रहे थे.

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प्रतीकात्मक तस्वीर (PTI) प्रतीकात्मक तस्वीर (PTI)

aajtak.in

  • चेन्नई,
  • 19 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 12:19 AM IST

  • केरल में लौटे 5 लाख से अधिक प्रवासी
  • अब तक सफल रहे सिस्टम पर बढ़ा दबाव
कोविड-19 को मात देने में भारत के केरल राज्य ने न्यूजीलैंड जैसा ही करीब करीब अच्छा प्रदर्शन कर दिखाया था. ये संभव हुआ था बेहतरीन निगरानी सिस्टम, अच्छे कामकाज वाले सरकारी अस्पतालों, कल्याण उपायों और जवाबदेही वाली सरकारी मशीनरी की वजह से. लेकिन अब जैसे जैसे राज्य में केस बढ़ रहे हैं तो सवाल बनता है- क्या ऐसा होना अपरिहार्य था?

भारत में सबसे पहले कोरोना वायरस के कुछ केस केरल से ही रिपोर्ट हुए थे. इसके बावजूद इस राज्य ने मई तक सफलतापूर्वक वक्र को समतल कर दिया था जबकि अन्य राज्यों में केस तेजी से बढ़ रहे थे. ऐसे दिन भी थे जब राज्य में एक भी नया केस रिपोर्ट नहीं हो रहा था. अन्य दिनों में भी यहां सिंगल डिजिट में केस सामने आ रहे थे.

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राज्य ने सख्त कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और क्वारनटीन लागू किया, आइसोलेशन में रहने वालों को घर पर ही राशन और अन्य सप्लाई की डिलिवरी व्यवस्था की गई. सख्त पुलिसिंग से निर्देशों पर अमल संभव हुआ और अच्छी तरह से काम कर रहे सरकारी अस्पतालों ने संक्रमित लोगों की शीघ्र रिकवरी में मदद मिली.

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मई के पहले सप्ताह में केरल जब 500 केस तक ही पहुंचा था तो वहां 4 मौतें हुई थीं, तब तक महाराष्ट्र में 14,000 से अधिक और तमिलनाडु में 3,000 से अधिक केस रिपोर्ट हो चुके थे. इसके अतिरिक्त केरल ने महामारी के खिलाफ अपनी लड़ाई में पारदर्शी रवैया अपनाया. हर दिन विस्तृत डेटा जारी किया और नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कीं. 8 मई तक, राज्य में सिर्फ 16 सक्रिय केस रह गए थे. और इसके बाद सीमाएं फिर खुलीं.

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केरल ऐसा राज्य है, जिसमें इंटरनेशनल इमिग्रेशन गहराई से जुड़ा है. जैसे ही अन्य देशों में मामले बढ़े और खाड़ी देशों में नौकरियां कम होने लगीं, प्रवासी केरलवासी पहली संभव फ्लाइट से घर लौटने की कोशिश करने लगे. 7 मई को रात 10.08 बजे, संयुक्त अरब अमीरात से प्रवासियों को लेकर पहली उड़ान अबू धाबी से केरल लौटी.

घर लौटे हैं पांच लाख से अधिक नागरिक

तब से, पांच लाख से अधिक मलयाली विदेश और अन्य राज्यों से घर लौट आए हैं. लौटने वाले सभी लोगों की टेस्टिंग की सटीक स्थिति का पता नहीं है, राज्य सरकार के डेटा के मुताबिक 2.6 लाख लोग उड़ान से लौटे. 2.4 लाख सड़क से और 52,000 ट्रेन से और 1,600 समुद्र के रास्ते से लौटे. इनमें से 3,100 से अधिक अस्पतालों में आइसोलेशन में हैं. राज्य में मई के बाद से दर्ज किए गए 9,776 केसों में दो-तिहाई बाहर से आने वाले यात्रियों के है.

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नतीजतन, केरल में अब सबसे तेजी से केस बढ़ने वाले राज्यों में से एक है. केरल में हर 11 दिनों में केस दोगुने हो रहे हैं. वहीं ऐसा होने में तमिलनाडु में 22 दिन और महाराष्ट्र में 23 दिन लग रहे हैं. तमिलनाडु और महाराष्ट्र कोरोनावायरस भारत में दो सबसे अधिक प्रभावित राज्य हैं. केरल केस दोगुने होने की तेज रफ्तार के मामले में छठे नंबर पर है. केस दोगुने होने का राष्ट्रीय औसत 21 दिन का है.

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रोजाना रिपोर्ट हो रहे कहीं अधिक केस

दूसरी लहर के असर का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि मई की शुरुआत से पहले केरल में किसी एक दिन में सबसे ज्यादा 39 केस 27 मार्च को रिपोर्ट हुए थे. लेकिन केरल अब रोजाना कहीं अधिक केस रिपोर्ट कर रहा है. 26 जून को एक ही दिन में 722 केस दर्ज हुए.

यदि राज्य का सिस्टम मजबूत रहा, यह इस लहर को बेहतर ढंग से निपट सकेगा. अभी तक केरल सरकार अपने अधिकतर प़ॉजिटिव केसों के लिए संक्रमण के स्रोत्र की पहचान करने में सफल रही है. लेकिन केसों की तेजी से बढ़ती संख्या के सामने केरल के सिस्टम भी जूझ रहे हैं. 16 जुलाई तक, केरल राज्य में कोविड-19 से हालिया 10 मौतों में आठ के संक्रमण के स्रोत्र का पता नहीं लग सका. अब तक, केरल में 11,000 से अधिक केस रिपोर्ट हुए हैं और 38 मौतें हो चुकी हैं.

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