चीन के प्रति नरम हुई बीजेपी, बुकलेट में लिखा- सकारात्मक संकेत मिले

चीन के प्रति बीजेपी के सुर बदल गए हैं. दो महीने पहले पार्टी ने जहां चीन को भारत के लिए बड़ा खतरा बताया था, वहीं अब पार्टी को चीन की तरफ से सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं.

पीएम मोदी और शी जिनपिंग.
राहुल विश्वकर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 31 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 3:22 PM IST

दो महीने से भी कम समय में बीजेपी की चीन के प्रति राय बदल गई है. बीजेपी ने अपने महिला मोर्चा कैडर में दो महीने पहले ही एक हिंदी में बुकलेट बंटवाई थी. इसमें चीन से भारत के संबंधों पर लिखा था कि चीन भारत के लिए एक बड़ा खतरा है. अब पार्टी ने इसी बुकलेट को अंग्रेजी में ट्रांसलेट कराया है. इसमें कहा गया है कि चीन से हमारा विवाद पुराना है. अभी तक लगता था कि चीन इस विवाद को निपटाने के लिए तैयार नहीं है. लेकिन हाल ही में पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद इस दिशा में सकारात्मक संकेत मिले हैं.

इससे पहले हिंदी की बुकलेट में लिखा था कि चीन विवादित मुद्दों को सुलझाने के मूड में नहीं दिख रहा. 1962 के बाद से सीमा पर एक भी गोली न चलने के बावजूद चीन लगातार सीमा पर गोला-बारूद इकट्ठा कर रहा है. हाल ही में चीन ने मुंबई हमले के दोषी जकीउर्ररहमान लखवी पर यूनाइटेड नेशन में पाकिस्तान का समर्थन किया था.  नई अंग्रेजी की बुकलेट में इन बातों को हटा लिया गया.

नई बुकलेट में इन बातों के बदले कुछ नई लाइनें जोड़ दी गई हैं. ‘बाहरी चुनौतियां’  भाग में लिखा गया है कि तब से सीमा पर शांति बनी हुई है. सीमा पर कोई बहस भी नहीं हुई है. इन सबके बावजूद चीन सीमा पर भारी मात्रा में गोला-बारूद इकट्ठा कर रहा है. हालांकि भारत के लिए अभी भी माहौल बेहद चुनौतीपूर्ण है. यूनाइटेड नेशन में कुछ मुद्दों पर चीन ने भारत विरोधी भूमिका निभाई थी.  

बुकलेट में कहा गया है कि हालांकि भारत ने  हमेशा चीन के साथ आर्थिक सहयोग की नीति अपनाई है. चीन लगातार अपनी नौसेना को मजबूत कर रहा है, जो भारत के समुद्री हितों के लिए गंभीर चुनौत बना रहा है. यह हम सभी के लिए चिंता का विषय है. भारतीय सीमा के पास एक लंबे रोड नेटवर्क का निर्माण करके चीन पाकिस्तान और श्रीलंका की मदद कर रहा है. इसने हिंद महासागर में भारत के नियंत्रण के लिए एक बड़ी चुनौती पैदा की है.

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