राफेल: PAC के पेच में फंसी मोदी सरकार, सुप्रीम कोर्ट से गलती सुधारने की गुहार

राफेल डील में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सियासी पारा और चढ़ गया है. जहां केंद्र ने कोर्ट के आदेश में हुई तथ्यात्मक गलती के सुधार के लिए गुहार लगाई है, तो वहीं कांग्रेस सरकार पर अदालत को गुमराह करने का आरोप लगा रही है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (AP) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (AP)

विवेक पाठक

  • नई दिल्ली,
  • 16 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 10:08 AM IST

फ्रांस से हुए राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर रार खत्म होने का नाम नहीं ले रही. सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्यायालय की निगरानी में जांच संबंधी सभी जनहित याचिकाओं को रद्द किया जाना केंद्र की मोदी सरकार क्लीन चिट के तौर पर ले रही है. तो वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने कोर्ट के आदेश में भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक (C&AG) और लोक लेखा समिति (PAC) के समक्ष राफेल संबंधी रिपोर्ट के जिक्र को हथियार बनाकर केंद्र पर अदालत को गुमराह करने का आरोप लगाया है.

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गलती सुधार के लिए SC में क्रेंद्र की गुहार

दरअसल, केंद्र ने शनिवार को उच्चतम न्यायालय का रुख कर राफेल लड़ाकू विमान सौदे पर शीर्ष न्यायालय के फैसले में उस पैराग्राफ में संशोधन की मांग की है जिसमें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के बारे में संदर्भ है. सरकार ने कहा है कि उसके नोट की अलग-अलग व्याख्या के कारण विवाद पैदा हो गया है.

PAC के सामने नहीं आई कैग रिपोर्ट

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पैरा 25 में इस बात का जिक्र किया गया था कि राफेल की कीमत संबंधी जानकारी कैग को साझा की गई है, जिसकी रिपोर्ट संसद की लोक लेखा समिति के पास है.  इस बारे में कहा गया कि रिपोर्ट का संपादित हिस्सा संसद के सामने रखा गया और यह सार्वजनिक है. बस कोर्ट के निर्णय के इसी हिस्से को हथियार बनाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने PAC मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ प्रेस कांफ्रेंस में हमला बोलते हुए कहा कि समिति के चेयरमैन खड़गे खुद कह रहे हैं कि ऐसी कोई रिपोर्ट उनके समक्ष नहीं रखी गई, तो क्या कोई समानांतर PAC चल रही है?

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सरकार ने खुद को और कोर्ट को किया शर्मिंदा

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि अब सरकार की तरफ से जो कहा जा रहा है वह सही मायने में न्यायालय पर उसके द्वारा से सील्ड कवर में दिए गए तथ्यों की गलत व्याख्या का दोष मढ़ना है. उन्हें कहना चाहिए था कि कीमत (राफेल की) से जुड़ी डिटेल कैग के साथ साझा की गई है, यह मामला अभी PAC के समक्ष नहीं आया है. सुप्रीम कोर्ट से जो कहा गया उसपर विश्वास करते हुए उसने आदेश दिया. अब वे (सरकार) शर्मिंदा हैं और कोर्ट को भी शर्मिंदा कर रहे हैं. कोर्ट के निर्णय का सिर्फ यही हिस्सा नहीं है जो तथ्यात्मक तौर पर गलत है.

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि पार्टी ने शुरू से ही राफेल मामले की जांच के लिए सु्प्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 32 के तहत लगाई गई जनहित याचिका को खारिज किया है. क्योंकि इस मामले में जिन तथ्यों की जांच होनी है उसका अधिकार सुप्रीम कोर्ट को नहीं है. लिहाजा इसकी जांच सिर्फ संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ही कर सकती है. 

बीजेपी की बड़ी तैयारी

उधर कोर्ट के आदेश को क्लीन चिट मानते हुए के तथाकथित झूठ को बेनकाब करने के लिए कमर कस ली है. जिसके तहत पार्टी 70 शहरों में प्रेस कांफ्रेंस करने की तैयारी में है. वहीं न्यायालय के आदेश के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा है कि कांग्रेस का रक्षा सौदों में घोटालों का इतिहास रहा है, फिर चाहे जीप घोटाला हो, बोफोर्स, अगस्ता वेस्टलैंड या सबमरीन घोटाला हो. कांग्रेस ने अपने कृत्य से सेना का मनोबल गिराया है.

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