मायावती बोलीं-भीमराव अंबेडकर के नाम पर नौटंकी कर रही है सरकार

मायावती ने आरोप लगाया कि अंबेडकर के नाम के साथ राजनीति की जा रही है. उन्होंने कहा कि लोगों में अंबेडकर को लेकर अपार श्रद्धा है और उनका नाम सम्मान के साथ लेते हैं. लोग जब भी उनका नाम लिखते हैं तो सबसे पहले परम पूज्य शब्द का इस्तेमाल करते हैं.

Advertisement
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (फाइल फोटो) उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 7:40 PM IST

उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार की ओर से भीमराव अंबेडकर के नाम में बदलाव कर भीमराव रामजी अंबेडकर करने पर विवाद बढ़ता जा रहा है, इसको लेकर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सत्तारुढ़ पार्टी पर आरोप लगाया कि उनका नाम लेकर लोग नौटंकी कर रहे हैं.

मायावती ने आरोप लगाया कि के नाम के साथ राजनीति की जा रही है. उन्होंने कहा कि लोगों में अंबेडकर को लेकर अपार श्रद्धा है और उनका नाम सम्मान के साथ लेते हैं. लोग जब भी उनका नाम लिखते हैं तो सबसे पहले परम पूज्य शब्द का इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने अपना पूरा जीवन दलितों के लिए जिया और उनके कल्याण के लिए काम किया. यही कारण है कि वो इतने परम पूज्य हैं.

Advertisement

के नाम में पिता का नाम जोड़े जाने की प्रासंगिकता पर सवाल उठाते हुए मायावती ने कहा कि यह सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का हथकंडा है.

नाम में पिता का नाम जोड़ा गया

उत्तर प्रदेश में अब संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का नाम बदला जाएगा. अंबेडकर के नाम के साथ अब उनके पिता 'रामजी मालोजी सकपाल' का नाम भी जोड़ा जाएगा. की सलाह के बाद योगी सरकार ने यह फैसला लिया है. अब उनका नाम 'डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर' होगा.

कहा जा रहा है कि राज्यपाल राम नाइक ने इसको लेकर 2017 में एक कैंपेन चलाया था. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी खत लिखा था. वह उनके नाम में बदलाव के लिए पिछले एक साल से अभियान चला रहे थे. उन्होंने नाम में बदलाव के लिए उस दस्तावेज का भी हवाला दिया था, जिसमें भीमराव अंबेडकर के हस्ताक्षरों में 'रामजी' नाम शामिल था.

Advertisement

हालांकि नाम बदलने जाने पर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है. ने आपत्ति दर्ज की है. उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम के मध्य में रामजी लिखे जाने से अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया है.

भरत के संविधान का मुख्य निर्माता को माना जाता है. वह आजाद देश के पहले कानून मंत्री थे. साल 1990 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था. अंबेडकर ने ही छुआछूत, दलितों, महिलाओं और मजदूरों से भेदभाव जैसी कुरीति के खिलाफ आवाज उठाई.

साल 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया, जिसके कारण लाखों दलितों ने ऐसा किया. 6 दिसंबर 1956 को मधुमेह से पीड़ित होने के कारण उनकी मृत्यु हो गई थी.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement