अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद देश को संबोधित कर सकते हैं मोहन भागवत

सर संघचालक मोहन भागवत या फिर सर कार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद देश को संबोधित भी कर सकते हैं. सूत्र बताते हैं कि अयोध्या पर अदालत के फैसले के बाद अपनी मीडिया रणनीति तैयार करने के लिए संघ बड़ी व्यस्तता के साथ काम कर रहा है.

संघ प्रमुख मोहन भागवत (फोटो-एएनआई)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 08 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 3:42 AM IST

  • अयोध्या पर फैसले के बाद देश को संबोधित कर सकते हैं मोहन भागवत
  • संघ ने तैयार की विस्तृत मीडिया रणनीति, सभी से शांति की अपील

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का टॉप लीडरशिप देश से संवाद कर सकता है. समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में संघ के सभी बड़े नेता लोगों से बात करेंगे और उन्हें अदालत के फैसले का स्वागत करने को कहेंगे.

भागवत या जोशी कर सकते हैं संबोधित

सर संघचालक मोहन भागवत या फिर सर कार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी सुप्रीम अदालत के फैसले के बाद देश को संबोधित भी कर सकते हैं. सूत्र बताते हैं कि अयोध्या पर अदालत के फैसले के बाद अपनी मीडिया रणनीति तैयार करने के लिए संघ बड़ी व्यस्तता के साथ काम कर रहा है. बता दें कि एक सप्ताह के अंदर सुप्रीम कोर्ट रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर अपना फैसला सुनाने वाला है. संघ एक विस्तृत प्लान तैयार कर रहा है कि फैसले के बाद अपने किस टॉप नेता को देश के किस कोने में बयान देने के लिए रखा जाए.

संघ के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने एएनआई से कहा, "अदालत के फैसले से क्या निकलता है, इस पर विचार करने के बाद इस बावत फैसला लिया जाएगा कि मोहन भागवत या भैयाजी जोशी मीडिया के जरिए देश को संबोधित करें."

शांति बनाए रखने की अपील

सूत्रों ने कहा कि फैसले का स्वागत करने के साथ ही संघ नेता समाज के सभी वर्गों से शांति बनाए रखने की अपील करेंगे और हालात पर भी निगाह रखेंगे. बता दें कि संघ ने पहले ही अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे फैसले का स्वागत करने में सयंम बरतें.

रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या पर फैसले के बाद की स्थिति पर चर्चा के लिए संघ के नेताओं ने बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से मीटिंग की. इस मीटिंग में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा मौजूद थे. गुरुवार को ही बीजेपी और संघ के नेताओं के बीच दिल्ली के महाराष्ट्र सदन में समन्वय बैठक हुई.

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