अयोध्या केस: मध्यस्थता न होने पर अरविंदो आश्रम नहीं देगा अपनी जमीन

अयोध्या भूमि विवाद में  श्री अरविंदो आश्रम ट्रस्ट ने मध्यस्थता पैनल को पत्र लिखकर कहा कि सभी पक्षकारों के बीच समझौता नहीं हुआ तो वह अपनी जमीन नहीं देगा.

पक्षकारों के बीच समझौता नहीं होने पर जमीन नहीं देगा अरविदों आश्रम पक्षकारों के बीच समझौता नहीं होने पर जमीन नहीं देगा अरविदों आश्रम
संजय शर्मा
  • नई दिल्ली,
  • 24 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 2:10 PM IST

  • पक्षकारों के बीच समझौता न होने पर जमीन नहीं देगा अरविंदो आश्रम
  • देश में शांति की मंशा से की थी जमीन सौंपने की पेशकश
  • मध्यस्थता पैनल से अपील, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाई जाए बात

अयोध्या भूमि विवाद में  श्री अरविंदो आश्रम ट्रस्ट ने मध्यस्थता पैनल को पत्र लिखकर कहा कि सभी पक्षकारों के बीच समझौता नहीं हुआ तो वह अपनी जमीन नहीं देगा.

आश्रम ने कहा कि पक्षकारों के बीच मध्यस्थता फेल होने या सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थकारों के बीच हुए समझौते से इत्तेफाक न रखने की स्थिति में वह अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है. हमारा ऑफर तब के लिए है, जब सभी पक्षकारों के बीच सर्वमान्य समझौता हो.

श्री अरविंदो आश्रम ने कहा कि हमने अपनी जमीन देने का ऑफर अच्छी मंशा से किया था . देश में शांति व भाईचारे के मद्देनजर हमारी ओर से यह ऑफर दिया गया था.

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मध्यस्थता पैनल से की अपील

आश्रम ने कहा कि अफवाह फैलाई जा रही है कि उनकी जमीन पर मस्जिद आदि बनाई जाएगी. हम कतई यह नहीं चाहते कि हमारी जमीन का इस्तेमाल सांप्रदायिक उद्देश्य के लिए हो. आश्रम ने मध्यस्थता पैनल से आग्रह किया है कि उनके पत्र को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा दिया जाए.

राष्ट्र के नाम भूमिदान का वादा

इससे पहले श्री अरविंदो आश्रम ट्रस्ट ने कहा था कि अगर मध्यस्थता होती है तो वो विवादित स्थल से सटे अपने 3 एकड़ ज़मीन जो 67 एकड़ के तहत केंद्र सरकार ने अधिग्रहण किया है वो राष्ट्र के नाम दान कर देंगे.

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नहीं हो सकी मध्यस्थता

दरअसल पिछले दिनों ऐसी खबर आई थी कि अयोध्या में विवादित श्रीराम जन्मभूमि पर मालिकाना हक के मुकदमे में सुन्नी वक्फ बोर्ड के अपना दावा छोड़ने को राजी है. हालांकि दावा छोड़ने की खबरों को सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष जुफर फारुकी ने खारिज करते हुए इसे अफवाह करार दिया था.

जुफर फारुकी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अपील वापस लेने का कोई हलफनामा नहीं दिया है. हमने मध्यस्थता पैनल को जरूर सेटेलमेंट का एक प्रपोजल दिया है जो बेहद गोपनीय है.

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