बदल रही घाटी की फिजा, आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों के साथ आए कश्मीरी

आतंकवादियों का सफाया करने के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन ऑलआउट की सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि इसमें सुरक्षा बलों को आम कश्मीरियों का सहयोग मिल रहा है.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • श्रीनगर,
  • 25 सितंबर 2017,
  • अपडेटेड 5:27 PM IST

पाकिस्तान की आतंकी साजिशों का से अब तक बेहाल रहे जम्मू एवं कश्मीर की घाटी की फिजा अब बदलती दिख रही है. अब तक अलगाववादियों के समर्थक रहे कश्मीरी अब मुख्यधारा की ओर बढ़ने लगे हैं.

अब तक सुरक्षाबलों के खिलाफ पत्थरबाजी करने वाली कश्मीरी अवाम अब आतंकवादियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का समर्थन करने लगी है. एक दिन पहले ही सुरक्षाबलों ने कश्मीर के उरी में बड़ी आतंकवादी साजिश को नाकाम करते हुए चार आतंकवादियों को मार गिराया. आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में यह सुरक्षा बलों के लिए बड़ी कामयाबी तो है, लेकिन सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि सुरक्षा बलों को इस अभियान में आम कश्मीरियों का साथ मिला.

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सुरक्षा बलों ने आतंकियों के खिलाफ चल रहे के तहत रविवार को उरी सेक्टर में चार आतंकवादियों को मार गिराया. लेकिन सुरक्षा बलों के लिए इस एनकाउंटर में आतंकियों के मारे जाने से बड़ी कामयाबी है स्थानीय लोगों का आतंकियों के खिलाफ अभियान में साथ देना.

सूत्रों के मुताबिक जैसे ही आतंकवादी उरी के इस गांव में घुसे स्थानीय लोगों ने सुरक्षा बलों को अलर्ट कर दिया. इसके बाद जैसे ही सुरक्षा बलों ने इलाके की नाकेबंदी कर दी और आतंकवादियों के सफाए का अभियान शुरू कर दिया. अभियान के दौरान स्थानीय लोगों ने गांव में इधर-उधर भाग-छिप रहे आतंकियों की सटीक लोकेशन की जानकारी देने में सुरक्षा बलों की मदद की. स्थानीय कश्मीरियों से मिले इन इनपुट्स के आधार पर सुरक्षा बलों ने आतंकियों को ठिकाने लगा दिया.

सुरक्षा बलों ने घाटी से आतंकवादियों का सफाया करने के लिए कुछ ही पहले ऑपरेशन ऑलआउट शुरू किया है. इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी कामयाबी यही है कि इसमें सुरक्षा बलों को आम कश्मीरियों का सहयोग मिल रहा है.

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इस साल आतंकियों के को मार गिराने में सुरक्षा बलों को स्थानीय लोगों से मिली जानकारी का बड़ा हाथ रहा है. एक के बाद एक आतंकी संगठनों के कमांडरों के बारे में मिल रही सटीक जानकारी ने सुरक्षा बलों को काफी राहत दी है. जबकि कुछ ही समय पहले तक आतंकियों से साथ मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों को पत्थरबाजों से निबटना होता था, जिसका फायदा उठाकर कई बार आंतकी भागने में कामयाब हो जाते थे.

ऐसे में स्थानीय लोगों का सुरक्षा बलों के साथ आना बताता है कि घाटी की फिजा बदल रही है और कभी अलगाववादियों के समर्थक स्थानीय कश्मीरी अब मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं. यह स्थानीय कश्मीरियों का सहयोग ही है, जिसके कारण पिछले एक साल से पाकिस्तानी आतंकियों के लिए कश्मीर घाटी में मूवमेंट करना मुश्किल हो रहा है.

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