लश्कर-ए-तैयबा आतंकी संगठन, प्रतिबंध जारी रहेंगे- अमेरिका

पाकिस्तानी अदालतों ने मुंबई 26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खुला घूमने का रास्ता तैयार कर दिया है. उसकी पाकिस्तान में नजरबंदी से रिहाई अब किसी भी वक्त हो सकती है. इस घटनाक्रम को भारत के साथ अमेरिका ने भी गंभीरता से लिया है.

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हाफिज सईद हाफिज सईद

गीता मोहन

  • नई दिल्ली,
  • 23 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 5:54 PM IST

पाकिस्तानी अदालतों ने मुंबई 26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खुला घूमने का रास्ता तैयार कर दिया है. उसकी पाकिस्तान में नजरबंदी से रिहाई अब किसी भी वक्त हो सकती है. इस घटनाक्रम को भारत के साथ अमेरिका ने भी गंभीरता से लिया है.

अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने बुधवार को कहा, ‘प्रशासन उन मीडिया रिपोर्ट्स से अवगत है जिनमें की घर में नजरबंदी से रिहाई का आदेश दिया गया है.’ अमेरिका अपने इस मत पर कायम है कि हाफिज सईद ग्लोबल टेरेरिस्ट है और उसके संगठन लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ अमेरिका के प्रतिबंध आगे भी जारी रहेंगे.  

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26/11 हमले को नौ साल पूरे होने से कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान की एक अदालत ने हाफिज की रिहाई का आदेश दिया. अदालत ने पाकिस्तान की प्रांतीय सरकार की उस अपील पर भी विचार नहीं किया जिसमे हाफिज की नजरबंदी को मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (MPO)  के तहत तीन महीने और बढ़ाने की मांग की गई थी.

पाकिस्तान सरकार ने आशंका जताई थी कि हाफिज की रिहाई से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रतिबंध लगाने का मौका मिलेगा. हालांकि पाकिस्तान सरकार का ही दोहरा चेहरा खुद बेनकाब हो गया क्योंकि उसने खुद ही ऐसे कोई सबूत पेश नहीं किए जिससे कि ये साबित हो कि क्यों हाफिज को नजरबंद रखना जरूरी है. यही कोर्ट के लिए हाफिज की रिहाई का आदेश देने का आधार बन गया.

जहां तक अमेरिका की बात है तो वहां की कांग्रेस के हालिया फैसले की काफी आलोचना हुई थी, जिसमें पाकिस्तान को अमेरिका से वित्तीय सहायता मिलने को इस बात से अलग कर दिया गया था कि पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है. हालांकि अमेरिकी प्रशासन की ओर से ये साफ किया गया कि वो अपने इस मत पर कायम है कि हाफिज सईद ग्लोबल टेरेरिस्ट है. अमेरिकी प्रशासन ने मई 2008 में हाफिज को एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 13324 के तहत ‘स्पेशियली डेजिगनेटेड ग्लोबल टेरेरिस्ट’ घोषित किया था. 26/11 हमले के बाद दिसंबर 2008 में संयुक्त राष्ट्र ने भी यूएनएससीआर 1267 के तहत हाफिज को वय्क्तिगत तौर पर इंगित किया था.  

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 26/11 हमले के गुनहगारों को कानूनी अंजाम तक लाने के लिए भारत और अमेरिका मिलकर काम करते आए हैं. इसके लिए इंटेलीजेंस इनपुट्स और सबूतों को भी आपस में साझा किया जाता रहा है. बता दें कि 26/11 हमले में मारे गए लोगों में कुछ अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे.

 अमेरिका के विदेश विभाग के अधिकारी ने कहा, ‘अमेरिका अपने इस मत को दोहराता है कि लश्कर-ए-तैयबा सूचीबद्ध विदेशी आतंकवादी संगठन है जो कि आतंकी हमलों में सैकड़ों निर्दोष लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार है, जिसमें कई अमेरिकी नागरिक भी शामिल हैं.’  

अधिकारी ने आगे कहा, ‘ और इसके कई फ्रंटल संगठन, नेता और सदस्य विदेश विभाग और ट्रेजरी डिपार्टमेंट, दोनों के प्रतिबंधों के दायरे में बने हुए हैं.’

इस साल 31 जनवरी से पाकिस्तान में घर में नजरबंद है. लेकिन अब अदालत के आदेश के बाद किसी भी समय उसकी रिहाई हो सकती है. 26/11 मुंबई हमले के के सिर पर अमेरिका ने एक करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम भी घोषित कर रखा है.

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