मस्जिद के लिए दूसरी जगह जमीन क्यों नहीं लेगा AIMPLB, बताई वजह

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के हक में जाने के बाद रविवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मसले पर बैठक की. बैठक के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दी जाएगी और उन्हें किसी और जगह मस्जिद मंजूर नहीं है. 

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देगा चुनौती (फाइल फोटो-PTI)
aajtak.in
  • लखनऊ,
  • 17 नवंबर 2019,
  • अपडेटेड 5:34 PM IST

  • AIMPLB ने लखनऊ में की प्रेस कॉन्फ्रेंस
  • बोर्ड को दूसरी जगह मस्जिद मंजूर नहीं है

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंदिर के हक में जाने के बाद रविवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मसले पर बैठक की. बैठक के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती दी जाएगी और उन्हें किसी और जगह मस्जिद मंजूर नहीं है.

बोर्ड के सचिव मोहम्मद महफूज रहमानी ने कहा कि हम मस्जिद के बदले जमीन नहीं लेंगे. शरीयत के हिसाब से हमें ऐसा कोई हक नहीं है क्योंकि शरीयत के मुताबिक एक बार मस्जिद हो गई तो वो आखिरी तक मस्जिद होती है.

राजीव धवन लड़ेंगे केस

मोहम्मद रहमानी ने कहा कि मस्जिद के एवज में हमें जमीन कबूल नहीं है. यह निर्णय ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया है. बैठक में यह भी तय हुआ कि राजीव धवन ही सुप्रीम कोर्ट में हमारे केस की पैरवी करेंगे.

हम कोर्ट न्याय के लिए गए थे

सचिव ने कहा कि हमें वही जमीन चाहिए, जिसके लिए हमनें लड़ाई लड़ी थी. मस्जिद के बदले में मुसलमान कोई भी दूसरी जमीन नहीं लेंगे. हम दूसरी मस्जिद लेने सुप्रीम कोर्ट नहीं गए थे. हम कोर्ट न्याय के लिए गए थे. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कुल 10 बिंदुओं पर फैसले को लेकर सवाल उठाए और कहा फैसले में कई खामियां हैं. इसलिए पुनर्विचार याचिका दाखिल करना जरूरी है.

9 नवंबर को आया था फैसला

बता दें कि 9 नवंबर को अयोध्या मामले में फैसला आया था. देश की सबसे बड़ी अदालत ने सबसे बड़े फैसले में अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान का हक माना है. जबकि मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन देने का आदेश दिया गया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की विशेष बेंच ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया था.

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