राजस्थान: जातियों के नाम पर वसुंधरा सरकार बनाएगी सामुदायिक भवन

सरकार के जातिगत आधार पर भवन बनाने के इस फैसले की किरकिरी होने से बचने के लिए सरकार ने एक गली निकाली है. उसमें शर्त रखा गया है कि ऐसे जातिगत सामाजिक संस्थाओं को यह शपथ पत्र देना होगा कि जो भी जाति के आधार पर सामुदायिक भवन बनेंगे उसमें दूसरे जातियों को भी इसका उपयोग करने दिया जाएगा.

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वसुंधरा राजे वसुंधरा राजे

अजीत तिवारी / शरत कुमार

  • जयपुर,
  • 03 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 8:53 AM IST

चुनाव सिर पर आते देख राजस्थान की वसुंधरा सरकार ने अब जाति कार्ड खेलना शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने घोषणा की है कि अब राजस्थान में जातियों और समाजों के नाम पर सरकार भवन बनवाएगी. जातिगत आधार पर बनने वाले भवनों का 80 फीसदी पैसा राज्य सरकार देगी और 20 फीसदी पैसा जाति और समाज के संगठन लगाएंगे.

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सरकार के जातिगत आधार पर भवन बनाने के इस फैसले की किरकिरी होने से बचने के लिए सरकार ने एक गली निकाली है. उसमें शर्त रखा गया है कि ऐसे जातिगत सामाजिक संस्थाओं को यह शपथ पत्र देना होगा कि जो भी जाति के आधार पर सामुदायिक भवन बनेंगे उसमें दूसरे जातियों को भी इसका उपयोग करने दिया जाएगा.

राज्य सरकार इसको बनाने में 80 फीसदी पैसे देगी उस पैसा को जुटाने के लिए 30 फीसदी पैसा स्थानीय निकाय देंगे और 50 फीसदी हिस्सा सीधे राज्य सरकार देगी. सरकार का कहना है कि इससे उन जातिगत समाजों को राहत मिलेगी जिनके पास अपना भवन बनाने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है.

राजस्थान में जातिगत आधार पर समाजों को रियायती जमीन आवंटन करने की रवायत रही है. ऐसे में सरकार का कहना है कि जातिगत और सामाजिक आधार पर जमीन आवंटन तो हो जाते हैं लेकिन कई बार समाज के पास भवन बनाने के लिए पैसा नहीं होता.

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गौरतलब है कि पिछली बार अशोक गहलोत ने सरकार के आखिरी दिनों में जातिगत आधार पर समाजों को जमीन आवंटन करने की झड़ी लगा दी थी. हालांकि, सत्ता में आते ही बीजेपी ने उन सबको यह कहते हुए रोक दिया था कि वोटों के जुगाड़ में सरकार ने यह सारी कार्रवाई की है. अब चुनाव को 4 महीने बचे हैं ऐसे में वसुंधरा सरकार ने भी जातिगत आधार पर उन सभी समाजों को जमीन आवंटित कर दी है.

अब पिछली सरकार से एक कदम आगे निकलते हुए उन पर भवन बनाने के लिए पैसे भी देने शुरू कर दिए हैं. गौर हो कि चुनाव के आखिरी दिनों में जातिगत आधार पर श्मशान को पैसे आवंटित करना शुरू किया गया था जिस पर कोर्ट ने रोक लगा दी थी. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस पूरे मामले पर कहा है कि उनकी सरकार के दौरान जो भी फैसले हुए थे वह जरूरत को ध्यान में रखते हुए थे. लेकिन वसुंधरा सरकार सिर्फ और सिर्फ जाति की राजनीति करने के आधार पर फैसले ले रही है.

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