सरकार ने स्कूलों को जारी किया फरमान, खरीदो और पढ़ाओ दीन दयाल की जीवनी

राजस्थान सरकार ने राज्य के सभी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों को फरमान जारी किया है कि भारतीय जन संघ के नेता दीन दयाल उपाध्याय का जीवन और इनके विचार पढ़ने के लिए किताबें खरीदी जाएं.

पंडित दीन दयाल उपाध्याय
शरत कुमार
  • जयपुर,
  • 03 मार्च 2017,
  • अपडेटेड 1:34 AM IST

राजस्थान सरकार ने राज्य के सभी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों को फरमान जारी किया है कि भारतीय जन संघ के नेता दीन दयाल उपाध्याय का जीवन और इनके विचार पढ़ने के लिए किताबें खरीदी जाएं. शिक्षा विभाग की तरफ से आदेश के बाद राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की तरफ से चिट्ठी भेजी गई है कि भारतीय जनसंघ जो कि अब भारतीय जनता पार्टी है उनके नेता दीन दयाल उपाध्याय के संपूर्ण जीवन पर लिखी किताब दीन दयाल उपाध्याय संपूर्ण वांग्मय नाम की किताब सभी स्कूलों में खरीदी जाए और लाइब्रेरी में रखकर इसे बच्चों को पढ़ाया जाए.

बच्चों के जरूरी काम के पैसे से खरीदी जाएगी किताब खास बात है कि दिल्ली के प्रकाशक प्रभात प्रकाशन की इस किताब को स्कूल डेवलपमेंट फंड से खरीदने के लिए कहा गया है जो बच्चों के जरुरी काम के लिए होते हैं. 27 फरवरी को स्कूलों को भेजी गई इस चिट्ठी में लिखा है कि इस पुस्तक की कीमत बाजार में 6000 रुपए है मगर स्कूलों को 4000 रुपए में दिया जाएगा.

मोदी ने किया था किताब का विमोचन इस किताब का विमोचन बीजेपी के पूर्व सांसद महेशचंद शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों दीनदायाल जन्मशताब्दी समारोह के दौरान करवाया था. नाम नहीं छापने की शर्त पर बहुत सारे स्कूल के शिक्षकों ने कहा कि हमारे पास तो इतना पैसा ही नहीं है कि इतनी महंगी किताबें पढ़ें.

कांग्रेस ने लगया भगवाकरण का आरोप कांग्रेस के प्रवक्ता अर्चना शर्मा ने कहा कि शिक्षा के भगवाकरण ये सरकारी पैसे से कर रहे हैं. जबकि शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि सभी महापुरुषों की किताबें स्कूल के लाईब्रेरी में रखी जाती हैं ये कोई नया आदेश नहीं है. दीन दयाल जी के विचारों को बच्चे पढ़ें इसमें क्या बुराई है.

पहले भी जारी किया था सर्कुलर इससे पहले राजस्थान सरकार ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के विचारक राकेश सिन्हा की लिखी किताब आधुनिक भारत के निर्माता- केशव बलिराम हेडगवार भी खरीदेने के लिए सभी स्कूलों को सर्कूलर जारी किया था. आरएसएस के संस्थापक हेडगवार की इस बायोग्राफी को भारत सरकार के सूचना एवं प्रकाशन विभाग ने छापा है.

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