वसुंधरा राजे ने 17 मिनट की मजदूरी कर कमाए 23 करोड़

वसुंधरा राजे देवरी गांव पहुंची और खुद ही खुदाई शुरू की. 17 मिनट तक वसुंधरा राजे मिट्टी की खुदाई तलाब में करती रहीं और खुद हीं मिट्टी ढोती रहीं. उनको पसीने बहाते देख दान दाताओं यानी किसानों की लाइन लग गई. इलाके में काम करने वाले उद्योगपति भामाशाह बनें तो आम जनता और नेता-अफसरों ने भी अपने बटुए खोल दिए.

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे
शरत कुमार
  • जयपुर,
  • 10 दिसंबर 2016,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे इन दिनों कुदाल और फावड़ा लेकर मिट्टी खोद रही हैं और सिर पर मिट्टी उठा भी रही हैं. आप सोच रहे होंगे कि महरानी मजदूरनी कैसे बन गई हैं. दरअसल, वसुंधरा राजे झालावाड़ के देवरी और बारां के तुलसां गांव में अपने अभियान के तहत गांव में पानी जमा करने के लिए तालाब और कुएं खुदवा रही हैं. इसकी खासियत ये है कि ये सारा काम वो सरकारी पैसे से नहीं बल्कि जनता के पैसे से हीं करवा रही हैं.

यानी जिस इलाके में पानी इकट्ठा करने के लिए तालाब खुदेंगे उस इलाके के लोग अपना पैसे लगाएंगे. इसकी वजह ये है कि एक तो सरकार के पास इतना फंड नहीं है और दूसरा जब ये खुद के पैसे से काम करवाएंगे तो इसकी चिंता भी इन्हें रहेगी. इसमें मजदूरी भी जनसहयोग से ही हो रहा है. इसलिए वसुंधरा राजे ने खुद इसकी शुरुआत खुद. वो देवरी गांव पहुंची और खुद ही खुदाई शुरू की. 17 मिनट तक वसुंधरा राजे मिट्टी की खुदाई तलाब में करती रहीं और खुद हीं मिट्टी ढोती रहीं. उनको पसीने बहाते देख दान दाताओं यानी किसानों की लाइन लग गई. इलाके में काम करने वाले उद्योगपति भामाशाह बनें तो आम जनता और नेता-अफसरों ने भी अपने बटुए खोल दिए.

देखते ही देखते तालाब खुदवाने के लिए 17 मिनट में ही 23 करोड़ रुपये इकट्ठा हो गए. इस मौके पर वसुंधरा राजे ने कहा कि मैं पैसे इकट्ठा करके पंचायत को देकर जा रही हूं लेकिन पानी सहजने और इसके रख-रखाव का जिम्मा आपको उठाना होगा. दरअसल राजस्थान क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का सबसे बड़ा राज्य है मगर पानी यहां देश का मात्र एक फीसदी ही है. इसलिए वसुंधरा राजे ने राज्यभर में जल स्वावलंबन अभियान चलाया है.

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