पंजाब में धान की कटाई का मौसम शुरू हो गया है. राज्य में पहले ही 11 अक्टूबर तक पराली जलाने में 45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, हालांकि प्रशासन को उम्मीद है कि इस साल सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद इसमें कमी आएगी.
बता दें कि 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच की अवधि को महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि अधिकांश किसान इस दौरान अपनी धान की फसल काटते हैं. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में पिछले साल 11 अक्टूबर तक पराली जलाने की 435 घटनाएं दर्ज की गई थीं जबकि इस साल इसी अवधि में यह आंकड़ा बढ़कर 630 तक पहुंच गया.
अकेले अमृतसर में इस अवधि के दौरान खेत में पराली जलाने की 295 घटनाएं हुई हैं. तरनतारन और पटियाला में क्रमशः 126 और 57 मामले दर्ज किए गए हैं.
मगर वहीं पंजाब के कृषि सचिव के. एस. पन्नू का कहना है कि उपग्रहों द्वारा ली गई तस्वीरों से पराली जलाने की स्पष्ट तस्वीर नहीं मिल पाती है. उन्होंने कहा, 'सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में डंप यार्ड और श्मशान घाट की तस्वीरें भी शामिल हैं. अभी पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं लगभग नगण्य हैं. पिछले साल की तुलना इस साल ऐसे मामलों में कमी आई है.'
पन्नू ने कहा कि केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में 2016 में 1 से 10 अक्टूबर तक पराली जलाने की घटनाएं 1,714 दर्ज की गई थीं लेकिन 2019 में इस अवधि में ये घटनाएं घटकर 430 हो गई हैं.
किसानों को चेतावनी
बता दें कि पंजाब सरकार ने पराली जलाने के खिलाफ किसानों को पहले ही चेता चुकी. राज्य सरकार ने कहा था कि जो लोग पंचायत की जमीन जोतते हैं यदि उन्हें पराली जलाते पाया गया तो जमीन का पट्टा लेने पर रोक लगा दी जाएगी. कृषि विभाग ने ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग से आग्रह किया है कि वे पराली जलाने पर रोक लगाकर स्वच्छ, हरित और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण सुनिश्चित करें.
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