कैग की रिपोर्ट- बादल ने ऐसे लगाया सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब की पिछली सरकार ने अपने कामकाज को प्रचारित करने पर ही सरकारी खजाने को 44 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया.

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प्रकाश सिंह बादल प्रकाश सिंह बादल

केशवानंद धर दुबे / मोनिका गुप्ता / मनजीत सहगल

  • चंडीगढ़,
  • 24 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 11:16 AM IST

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके पुत्र उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल को लेकर खुलासे हुए हैं. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब की पिछली सरकार ने अपने कामकाज को प्रचारित करने पर ही सरकारी खजाने को 44 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया.

विधानसभा में शुक्रवार को रखी गई कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बादल सरकार के कार्यकाल के आखिरी साल में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने 60 ऐसे विज्ञापन क्लिप तैयार करवाएं. इनमें से 20 वीडियो क्लिप्स में बादलों को 'साहब' बताया गया था. इन वीडियो क्लिप्स में बादलों को ना केवल साहब बल्कि उनका व्यक्तित्व चमकाने के प्रयास किए गए. पंजाब सरकार एक और जहां बुजुर्गों की पेंशन और दलित छात्रों के वजीफे कहीं और खर्च कर रही थी, वहीं बादल खुद को चमकाने में लगे थे.

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कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब सरकार ने 2015 से 2017 के बीच प्रचार पर कुल 236.73 करोड़ रुपए खर्च किए. इनमें से 184.94 करोड़ रुपए चुनाव से ठीक पहले यानी 2017 के दौरान खर्च किए गए.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की हुई अवहेलना

कैग की रिपोर्ट ने तत्कालीन सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि सरकारी खजाने में से 25.60 करोड़ रुपए तो सिर्फ बादलों को साहब बताने पर ही खर्च किए गए. रिपोर्ट में कहा गया है कि विज्ञापनों पर खर्च किए गए कुल 44 करोड़ रुपए जो नियमों के अनुकूल नहीं थे. इनके इस्तेमाल में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों की अवहेलना भी की गई.

कैग की नवीनतम रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब सरकार ने जितने भी विज्ञापन बनवाए वह बादलों पर केंद्रित थे. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों में साफ कहा है कि कोई भी सत्तारूढ़ पार्टी सरकारी विज्ञापनों का इस्तेमाल राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए नहीं कर सकती.

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तैयार करवाए गए विज्ञापन के वीडियो क्लिप

रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने अप्रैल 2016 से जनवरी 2017 के बीच विज्ञापन के वीडियो क्लिप तैयार करवाए थे. इनमें से 27 वीडियो क्लिप 7 सेकेंड से लेकर 5 मिनट समयावधि के थे. इन वीडियो क्लिप्स के निर्माण पर 2.12 करोड़ रुपए खर्च किए गए. इन को विभिन्न टेलीविजन चैनलों में प्रसारित करने पर 9.6 करोड़ रुपए खर्च किए गए.

पंजाब सरकार के बजाय 'बादल सरकार' की गिनाई उपलब्धियां

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए तत्कालीन पंजाब सरकार ने जुलाई 2016 से नवंबर 2016 के बीच  विभिन्न समाचार पत्रों के 85 संस्करणों में 9 डिस्प्ले विज्ञापनों पर 66.05 लाख रुपए खर्च कर डाले. विज्ञापन जारी तो किए गए थे पंजाब सरकार की उपलब्धियों के नाम पर लेकिन उनमें पंजाब सरकार के बजाए लिखा गया था 'अकाली दल और भाजपा सरकार'  की उपलब्धियां.

विज्ञापनों पर किया गया 12.52 करोड़ खर्च

तत्कालीन पंजाब सरकार ने जुलाई 2016 और नवंबर 2016 के बीच चार साहबजादे फिल्म दिखाने के नाम पर 50 एलईडी वेन को किराए पर लिया था. लेकिन फिल्म के बीच में बादल सरकार के जिसमें सरकार के बजाय प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल का गुणगान किया गया. दूरदराज के गांव में दिखाए गए इन विज्ञापनों पर 12.52 करोड़ रुपए खर्च किए गए.

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यही नहीं पंजाब सरकार ने 'बादल सरकार' की उपलब्धियां गिनाने के लिए 3306 होल्डिंग्स और बैनर भी प्रदर्शित किए जिन पर 'शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी' की तारीफों के पुल बांधने के लिए सरकारी खजाने से 20.21 लाख रुपए खर्च कर दिए गए.

रेडियो पर भी लिया गया विज्ञापन का सहारा

'बादल सरकार' की उपलब्धियां गिनाने के लिए रेडियो पर भी विज्ञापन का सहारा लिया गया. सरकार ने 11 ऑडियो क्लिप्स को 234 बार प्रसारित करने के लिए 45.94 लाखों रुपए खर्च किए. यही नहीं बादलों की मिजाजपुर्सी के लिए बाकायदा एक फिल्म भी तैयार करवाई गई थी. जिस पर 12.52 करोड़ रुपए खर्च हुए इस फिल्म के 6018 गए. यह फिल्म शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा निशुल्क वितरित की गई थी.

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