पंजाब: हाई कोर्ट ने जज को दिया निबंध लिखने का आदेश, जानें क्या है पूरा मामला

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट के अग्रिम जमानत संबंधी 10 आदेश पढ़कर 30 दिन में निबंध तैयार करना होगा. इसके बाद उसे चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी के निदेशक को सौंपना होगा.

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पंजाब हाई कोर्ट का अनोखा निर्देश (फाइल फोटो) पंजाब हाई कोर्ट का अनोखा निर्देश (फाइल फोटो)

मनजीत सहगल

  • चंडीगढ़,
  • 21 जनवरी 2021,
  • अपडेटेड 10:59 AM IST
  • हाई कोर्ट ने जज को दिया निबंध लिखने का आदेश
  • 10 आदेश पढ़कर 30 दिन में निबंध तैयार करना होगा

अग्रिम जमानत के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुसरण नहीं करने को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने लुधियाना के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को निबंध लिखने का आदेश दिया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट के अग्रिम जमानत संबंधी 10 आदेश पढ़कर 30 दिन में निबंध तैयार करना होगा. इसके बाद उसे चंडीगढ़ न्यायिक अकादमी के निदेशक को सौंपना होगा. 

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दरअसल अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने हिरासत में मौत का मामला झूठा पाए जाने के बावजूद आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था. इस मामले को लेकर आरोपी, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गए और अंतरिम जमानत याचिका की गुहार लगाई. जिसके बाद हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के 10 आदेशों पर एक निबंध लिखने को कहा है.  

क्या है मामला?

याचिकाकर्ता पुलिस कर्मचारी अमरजीत सिंह और दो अन्य लोगों ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ हिरासत में मौत का एक झूठा मामला दर्ज किया गया था. याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट को बताया कि जिस व्यक्ति को मृत दिखाया गया था वह वास्तव में जीवित था और उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार थे. बावजूद इसके लुधियाना की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी.

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मामला साल 2005 का है जब हरदीप सिंह नाम के एक व्यक्ति को नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. हरदीप सिंह के पिता नागेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उनके बेटे को गैर कानूनी तरीके से हिरासत में रखा और बाद में यातनाएं देकर उसकी हत्या कर दी. 

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सबूत के तौर पर तालाब से एक शव भी बरामद करवाया गया, जिसे हरदीप सिंह बताया गया. लेकिन जांच के दौरान लाश हरदीप सिंह कि नहीं, किसी और की निकली. इतना ही नहीं सभी सबूत हिरासत में हुई हत्या के मामले को झूठा करार दे रहे थे. बावजूद इसके पंजाब पुलिस के कर्मचारी अमरजीत और दो अन्य लोगों को जमानत नहीं मिली.

बाद में जब यह मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के संज्ञान में आया तो कोर्ट ने ना केवल निचली अदालत के जज को फटकार लगाई बल्कि झूठा मामला दर्ज करवाने के आरोप में हरदीप सिंह के पिता नागेंद्र सिंह और एक गवाह पर क्रमश: दो लाख और ₹50 हज़ार का जुर्माना भी लगाया.

इस मामले में जमानत न देने पर हाई कोर्ट ने लुधियाना के जज के खिलाफ सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि ज्यूडिशियल अकादमियों में लगातार शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने के बावजूद भी जज अपनी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं करते.

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हाईकोर्ट ने कहा है कि इस मामले में संबंधित जज ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल नहीं किया, जो जमानत पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई विभिन्न व्यवस्थाओं की अनदेखी है.

 

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