लोकसभा में बुधवार को महिला आरक्षण बिल पर जोरदार बहस शुरू हो चुकी है. इस पर बोलते हुए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कोटे में भी कोटे की मांग कर दी है. उन्होंने कहा है कि जातिगत जनगणना कराकर अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के आरक्षण की भी व्यवस्था की जानी चाहिए. सरकार को इसे लागू करने के लिए जल्द से जल्द कदम उठाने चाहिए.
सोनिया गांधी ने लोकसभा में कहा,'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की तरफ से मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में खड़ी हूं. धुएं से भरी हुई रसोई से लेकर रोशनी से जगमगाते हुए स्टेडियम तक भारत की स्त्री का सफर बहुत लंबा है. लेकिन आखिरकार उसने मंजिल को छू लिया है. उसने जन्म दिया, उसने परिवार चलाया, उसने पुरुषों के बीच तेज दौड़ लगाई और असीम धीरज के साथ अक्सर खुद को हारते हुए, लेकिन आखिरी बाजी में जीतते हुए देखा.'
थकना और आराम करना नहीं जानती
उन्होंने कहा,'भारत की स्त्री के ह्रदय में महासागर जैसा धीरज है, उसने खुद के साथ हुई बेईमानी की शिकायत नहीं की और सिर्फ अपने फायदे के बारे में कभी नहीं सोचा. उसने नदियों की तरह सबकी भलाई के लिए काम किया है और मुश्किल वक्त में हिमालय की तरह अडिग रही. स्त्री के धैर्य का अंदाज लगा पाना नामुमकिन है. वह आराम को नहीं पहचानती और थक जाना भी नहीं जानती है. स्त्री हमारे महान देश की मां है. लेकिन उसने हमें सिर्फ जन्म ही नहीं दिया है, बल्कि अपने आंसुओं और खून पसीने से सींचकर हमें अपने बारे में सोचने लायक बुद्धिमान और शक्तिशाली भी बनाया है.'
कंधे से कंधा मिलाकर लड़ी हर लड़ाई
सोनिया गांधी ने आगे कहा,'स्त्री की मेहनत, स्त्री की गरिमा और स्त्री के त्याग की पहचान करके ही हम लोग मनुष्यता की परीक्षा में पास हो सकते हैं. आजादी की लड़ाई और नए भारत के निर्माण के हर मोर्चे पर स्त्री पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ी है. अपनी आकांक्षा, तकलीफों और घर-गृहस्थी के बोझ के नीचे नहीं दबी है.'
सोनिया ने इन नेताओं को किया याद
कांग्रेस नेता ने कहा,'सरोजनी नायडू, सुचेता कृपलानी, अरुणा आसफ अली, विजयलक्ष्मी पंडित, राजकुमारी अमृत कौर और उनके साथ लाखों लाख महिलाएं से लेकर आज की तारीख तक स्त्री ने कठिन समय में हर बार महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, बाबा साहब आंबेडकर और मौलाना आजाद के सपनों जमीन पर उतारकर दिखाया है. इंदिरा गांधीजी का व्यक्तित्व इस सिलसिले में एक बहुत ही रोशन और जिंदा मिशाल है.'
हमारे पास 15 लाख चुनी हुई महिला नेता
उन्होंने कहा,'खुद मेरी जिंदगी का यह बहुत मार्मिक छड़ है. पहली बार स्थानीय निकायों में स्त्री की भागीदारी तय करने वाला संविधान संशोधन मेरे जीवनसाथी राजीव गांधीजी ही लाए थे, जो राज्यसभा में 7 वोटों से गिर गया था. बाद में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व कांग्रेस सरकार ने ही उसे पारित कराया. आज उसी का नतीजा है कि देशभर में के स्थानीय निकायों के जरिए हमारे पास 15 लाख चुनी हुई महिला नेता हैं. राजीव गांधीजी का सपना अभी तक आधा ही पूरा हुआ है. इस बिल के पारित होने के साथ ही वह पूरा होगा.'
13 साल से इंतजार कर रही हैं स्त्रियां
सोनिया ने कहा,'कांग्रेस पार्टी इस बिल का समर्थन करती है. इस बिल के पास होने से हमें खुशी है. लेकिन इसके साथ-साथ एक चिंता भी है. मैं एक सवाल पूछना चाहती हूं, पिछले 13 वर्षों से भारतीय स्त्रियां अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी का इंतजार कर रही हैं, और अब उन्हें कुछ वर्ष और इंतजार करने के लिए कहा जा रहा है. कितने वर्ष दो, चार या छह या आठ वर्ष. क्या भारत की स्त्रियों के साथ यह बर्ताव उचित है. कांग्रेस की मांग है कि यह बिल तुरंत अमल में लाया जाए.'
aajtak.in