अशोक गहलोत के इनकार करने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव काफी दिलचस्प होता दिख रहा है. राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह और केरल से सांसद शशि थरूर ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर रखा है और दोनों नेताओं ने नामांकन पत्र भी ले लिए हैं. उधर, मल्लिकार्जुन खड़गे भी सोनिया गांधी से मिले हैं. ऐसे में चर्चा है कि वह गहलोत की जगह खड़गे हाईकमान की पसंद हो सकते हैं.
शुक्रवार को नामांकन पत्र जमा करने की आखिरी तारीख है. ऐसे में दिग्विजय और थरूर के अलावा मुकुल वासनिक और कुमारी शैलजा के भी चुनाव लड़ने की चर्चा तेज हैं. इस तरह से कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं. हालांकि, एक अहम सवाल यह है कि गहलोत के पीछे हट जाने के बाद कांग्रेस नेतृत्व की पंसद का कौन कैंडिडेट होगा?
कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर जी-23 सक्रिय
कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की सरगर्मी के बीच जी-23 के नेता सक्रिय हो गए हैं. गुरुवार रात दिल्ली में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा के घर जी-23 गुट की बैठक हुई. बैठक में मनीष तिवारी, पृथ्वीराज चव्हाण, भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत कांग्रेस जी-23 खेमे के कई बड़े नेता मौजूद रहे. इस बैठक से कयास लगाए जा रहे हैं कि जी-23 से कोई नेता भी अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश कर सकते है. कांग्रेस अध्यक्ष के लिए जी-23 से शशि थरूर पहले से ताल ठोक रहे हैं. इसके अलावा मनीष तिवारी और मुकुल वासनिक के भी चुनाव लड़ने की चर्चा तेज है.
खड़गे भी उतरेंगे चुनावी मैदान में
अशोक गहलोत का नाम हटने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद के दावेदारों में दिग्विजय सिंह और शशि थरूर ही बचे हैं. लेकिन, कांग्रेस हाई से पार्टी नेताओं की जिस तरह मुलाकातें हो रही है, उससे यही लगता है कि गांधी परिवार के पसंद का कैंडिटेट को लेकर अभी भी कशमकश बनी हुई है. मलिकार्जुन खड़गे गुरुवार को सोनिया गांधी से मिले हैं, कहा जा रहा है कि वह कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ेंगे.
खड़गे का सियासी सफर
मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस और कर्नाटक की सियासत के दिग्गज नेता माने जाते हैं. गांधी परिवार के करीबी हैं और दलित समुदाय से भी आते हैं. यूपीए सरकार में रेल मंत्री और श्रम और रोजगार मंत्री रहे. खड़गे अपने सियासी सफर में आठ बार विधायक, दो बार लोकसभा और मौजूदा समय में राज्यसभा सदस्य हैं. कर्नाटक में पले-बढ़े खड़गे ने वकालत की पढाई की, मजदूर संघ के लोगों के लिए कई मुकदमे लड़े. पहले छात्र नेता बनकर उभरे, मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ी और फिर कांग्रेस पार्टी में जगह बना ली. राज्य से लेकर केंद्र तक मंत्री रहे. 2014 से 2019 तक में संसद में नेता प्रतिपक्ष रहे और अब राज्यसभा में कांग्रेस नेता सदन हैं.
मुकुल वासनिक जी-23 में शामिल रहे
मुकुल वासनिक पार्टी के उस जी-23 के नेताओं में शामिल रहे हैं, जिन्होंने साल 2020 में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को पत्र लिखा था. पत्र में जी-23 नेताओं ने पार्टी में आमूल-चूल बदलाव लाने की वकालत की गई थी. मुकुल वासनिक भी उस खत पर हस्ताक्षर करने वालों में शामिल थे. हालांकि, कहा जाता है कि वह जी-23 में सक्रिय नहीं थे और सिर्फ औपचारिक तौर पर उन्होंने हस्ताक्षर भर किए थे. वासनिक को नेहरू-गांधी परिवार का वफादार माना जाता है. कहा जाता है कि उनकी छवि साफ रही है और पार्टी में दूसरे नेताओं की विवादास्पद छवि से इतर वह विवादों से दूर रहे हैं.
दिग्विजय का का सियासी सफर
75 साल के दिग्विजय सिंह अनुभवी नेता हैं. वे दो बार (10 साल) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं. दिग्विजय जब 25 साल के थे, तब उन्होंने कांग्रेस में एंट्री की थी. उन्होंने 22 साल उम्र में राघोगढ़ से निर्दलीय नगर पालिका का चुनाव जीता था. दिग्विजय सिंह को सरलता के लिए पहचाना जाता है. दिग्विजय शाही परिवार से आते हैं और ठाकुर समाज से हैं. उन्हें हिंदी भाषी क्षेत्र का बड़ा नेता माना जाता है.
बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं दिग्विजय
दिग्विजय को गांधी परिवार का वफादार भी माना जाता है. उनका खासतौर पर मध्य प्रदेश में जनाधार है, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में वे भोपाल से हार गए थे. दिग्विजय सिंह को राजनीति में मंझे हुए खिलाड़ी माना जाता है. उन्होंने कांग्रेस के भीतर और बाहर अपने विरोधियों को परास्त किया. दिग्विजय अक्सर अपने बयानों को लेकर भी चर्चा में रहते हैं. उनकी स्पष्ट और विवादास्पद बयानबाजी अक्सर चर्चा में रहती है.
दिग्विजय सिंह को लेकर रबर स्टैंप पर लोगों की मिली-जुली राय
दिग्विजय को संगठनात्मक अनुभव भी है. इसके साथ ही कांग्रेस के ढांचे की पेंचीदगियों और जटिलताओं से अच्छी तरह वाकिफ हैं. कांग्रेस के एक वर्ग में दिग्विजय को सम्मान से देखा जाता है. राजनीति के जानकारों का कहना है कि वे कांग्रेस अध्यक्ष पद के रूप में रबर स्टैंप हो भी सकते हैं और नहीं भी. गांधी परिवार के साये में काम करते आए हैं.
शशि थरूर को जेंटलमैन के लिए पहचाना जाता है
वहीं, केरल के तिरुवंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर (66 साल) भी कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनावी मैदान में हैं. थरूर 9 मार्च 1956 को लंदन में पैदा हुए. उनका परिवार मूल रूप से केरल के पलक्कड से आता है. शशि को वैसे तो बुद्धिमान और जेंटलमैन के लिए पहचाना जाता है. इसके साथ ही उन्होंने करिश्माई व्यक्तित्व और तेजतर्रार के नेता के रूप में भी पहचान बनाई है. थरूर उच्च जाति नायर समाज से आते हैं.
केरल में 2009 में पहला चुनाव लड़े और जीते
थरूर हाल ही में कांग्रेस के असंतुष्ट ग्रुप G 23 का हिस्सा रहे हैं. थरूर सीमित जनाधार वाले लोकसभा सांसद माने जाते हैं. उनका करियर राजनयिक और प्रसिद्ध लेखक के तौर पर शुरू हुआ था. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के साथ करीब 3 दशकों तक काम किया और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए. साल 2009 में तिरुवंतपुरम से पहला लोकसभा चुनाव लड़ा और जीते. साल 2010 में शशि को केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री बनाया गया. बाद में वो मानव संसाधन राज्य मंत्री भी बने. उन्होंने 2014 और 2019 में भी लोकसभा चुनाव जीता.
G-23 का हिस्सा रहे, खुद को साबित करने की चुनौती
थरूर के बारे में कहा जाता है कि वे ताजी हवा के एक ऐसे झोंका हैं, जिसकी कांग्रेस को आज सख्त जरूरत है. उन्हें सौम्य, करिश्माई और प्रभावशाली ढंग से मुखर होकर आवाज उठाने के लिए जाना जाता है. थरूर के पास एक वैश्विक दृष्टिकोण भी है और एक नए विजन के तौर पर भी देखा गया है. शशि थरूर मिडिल क्लास में खासे लोकप्रिय भी हैं. हालांकि, G-23 का हिस्से होने की वजह से पार्टी में खुद को साबित करने की चुनौती बढ़ गई है. शशि थरूर को रबर स्टैंप के रूप में नहीं देखा जा रहा है.
कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव पर कब कब हुआ चुनाव...
- कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव अक्सर आम सहमति से ही होते देखा गया है. 137 साल के इतिहास में सिर्फ कुछ ही मुकाबले देखने को मिले हैं.
- पहले वार्षिक सत्र की अध्यक्षता करने के लिए एक मोटिवेटर, एक नेता को आमंत्रित करता था और जब तक नए अध्यक्ष का चुनाव नहीं होता था, तब तक वही आमंत्रित व्यक्ति कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभालता था.
- रिकॉर्ड से पता चलता है कि पद के लिए पहला सीरियस कंटेस्ट 1939 में सुभाष चंद्र बोस और पट्टाभि सीतारामय्या के बीच हुआ था. बाद में गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने समर्थन दिया, लेकिन बोस जीत गए.
- 1950 में फिर से इस पद के लिए चुनाव नासिक अधिवेशन से पहले जेबी कृपलानी और पुरुषोत्तम दास टंडन के बीच लड़ा गया था. टंडन विजयी रहे लेकिन बाद में उन्होंने तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू के साथ मतभेदों के बाद इस्तीफा दे दिया. नेहरू ने 1951 और 1955 के बीच पार्टी प्रमुख और पीएम के दो पदों पर कार्य किया. नेहरू ने 1955 में कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ दिया और यूएन ढेबर उनके उत्तराधिकारी बने.
- 1947 और 1964 के बीच और फिर 1971 से 1977 तक ज्यादातर पार्टी अध्यक्ष प्रधानमंत्री के उम्मीदवार थे. 1997 में सीताराम केसरी ने प्रतिद्वंद्वियों शरद पवार और राजेश पायलट को हराकर कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव जीता.
- बाद में केसरी को मार्च 1998 में CWC के प्रस्ताव के जरिए कुर्सी से हटा दिया गया और एक साल पहले ही AICC की प्राथमिक सदस्य बनी सोनिया गांधी को पद संभालने का ऑफर किया गया. सोनिया 6 अप्रैल 1998 को औपचारिक रूप से अध्यक्ष चुनी गईं. बाद में 2017-2019 में एक ब्रेक लिया. सोनिया सबसे लंबे समय तक सेवा देने वालीं पार्टी नेता हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था.
- 2000 में जितेंद्र प्रसाद ने सोनिया को चुनौती दी और हार गए. 22 साल से इस पद के लिए कोई मुकाबला नहीं हुआ है. राहुल 2017 में सर्वसम्मति से चुने गए थे.
विभिन्न राजनीतिक दलों के हालिया चुनाव
| पार्टी का नाम | अध्यक्ष/ प्रमुख | अन्य उम्मीदवारों का नाम | चुनाव की तारीख |
| तृणमूल कांग्रेस | ममता बनर्जी | निर्विरोध | 2 फरवरी 2022 |
| राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | शरद पवार | निर्विरोध | 11 सितंबर-2022 |
| राष्ट्रीय जनता दल | लालू प्रसाद | निर्विरोध | 28 सितंबर, 2022 |
| समाजवादी पार्टी | अखिलेश यादव | निर्विरोध | 29 सितंबर 2022 |
| भारतीय जनता पार्टी | जेपी नड्डा | एक्सटेंशन मिलने की संभावना | (3 वर्ष का कार्यकाल 20 जनवरी, 2023 को समाप्त होगा) |
| कांग्रेस | दिग्विजय और थरूर कंडीडेट हो सकते हैं. | चुनाव होने की संभावना | 17 अक्टूबर, 2022 वोटिंग प्रस्तावित |
अशोक उपाध्याय