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इस शख्स ने खोजा था रसगुल्ला, जानें कैसे बंगाल को मिली पहचान

aajtak.in
  • 15 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 1:33 PM IST
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कहते हैं कि मिठाई हर जगह मिठास घोल देती है. लेकिन रसगुल्ले के कारण पिछले कुछ साल से भारत के दो राज्यों के बीच खटास पैदा हो गई थी. अब इस मुद्दे का फैसला आ गया है. रसगुल्ले की भौगोलिक पहचान पश्चिम बंगाल के नाम हो गई है, उसने इस जंग में ओडिशा को मात दी है.

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ऐसा दावा किया जाता है कि रसगुल्ले का ईजाद पश्चिम बंगाल में ही हुआ. 1868 में मशहूर मिठाई निर्माता नवीन चंद्र दास ने इसे बनाया था. उन्हें 'रसगुल्ले का कोलंबस' भी कहा जाता है. नवीन चंद्र दास का जन्म 1845 में नॉर्थ कोलकाता के बाग बाज़ार इलाके में हुआ था.


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नवीन चंद्र दास के पिता एक चीनी व्यापारी थे. नवीन के जन्म के कुछ समय बाद ही उनकी मृत्यु हो गई थी. जिसके बाद उनके परिवार की स्थिति काफी अच्छी नहीं थी.


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लेकिन 1868 में नवीन ने मिठाई बनाने की शुरुआत की. उन्होंने सबसे पहले एक मिठाई की छोटी दुकान खोली. उन्होंने अपनी इस दुकान में मिठाई को लेकर कई तरह के प्रयोग किए. तभी रसगुल्ले की भी शुरुआत हुई.



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नवीन के बेटे कृष्णा ने भी उनकी इस परंपरा को आगे बढ़ाया था. उन्होंने रसगुल्ले के बाद रसमलाई की शुरुआत की थी. कोलकाता में नवीन दास के घर को रसगुल्ला भवन का नाम दिया गया है.


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बता दें कि रसगुल्ले की भौगोलिक पहचान बंगाल को मिलने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ट्वीट कर खुशी जताई. ममता ने ट्वीट किया कि सभी के लिए खुशी की खबर है, हम काफी खुश और गर्व महसूस कर रहे हैं कि बंगाल को रसगुल्ले की भौगोलिक पहचान का टैग मिल गया है.


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ओडिशा सरकार में मंत्री प्रदीप कुमार ने 2015 में दावा किया था कि रसगुल्ला ओडिशा का है. पिछले 600 साल से रसगुल्ला ओडिशा में है. उन्होंने इसे भगवान जगन्नाथ के प्रसाद से भी जोड़ा था. उनका दावा था कि रसगुल्ला के इस्तेमाल पिछले 300 साल से पुरी की रथयात्रा में भी हो रहा है. जिसके बाद दोनों राज्यों के बीच रसगुल्ले को लेकर बहस जारी थी.

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