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अयोध्या में साधु-संतों के बीच संत छवि में नजर आए पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब अयोध्या में बुधवार को दोपहर 12.44.08 बजे राम मंदिर की आधारशिला रखी तो पूरी तरह भक्तिभाव में लीन दिखे. पीएम मोदी ने भूमि-पूजन में पारंपरिक लिबास धोती-कुर्ते को चुना था. बढ़ी हुई सफेद दाढ़ी, माथे पर तिलक लगाए और चेहरे पर शांत भाव के साथ वह अयोध्या के साधु-संतों के बीच संत की ही छवि में नजर आए.

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हालांकि, पीएम मोदी की ये छवि पहली बार नहीं दिखी है. जब वह 2019 के लोकसभा चुनाव में मतदान के बीच केदारनाथ गए थे तो किसी संन्यासी की भेषभूषा में ही नजर आए थे. तब उन्होंने एक गुफा में ध्यान भी लगाया था.

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मोदी खुद को फकीर भी कह चुके हैं. भूमि पूजन के दौरान बीजेपी के वो नेता पहली पंक्ति में रहे जिनकी छवि संत की तरह पेश की जाती है. वो चाहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हों या मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहीं उमा भारती. उमा भारती तो रामजन्मभूमि आंदोलन की अगुआ रही हैं.

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प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार तब अयोध्या गए हैं जब वहां सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया. यहां पहुंचतक उन्होंने जिस तरह से साष्टांग प्रणाम किया उसे देखकर उनके पहली बार संसद पहुंचने की याद आ गई. ठीक इसी तरह उन्होंने संसद को भी प्रणाम किया था जब वह प्रधानमंत्री चुने गए थे.  

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कल जब बीजेपी के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भूमिपूजन की पूर्व संध्या पर वीडियो संदेश जारी किया तो उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ की और कहा कि उनका सपना पूरा हो गया. अयोध्या में रामजन्मभूमि आंदोलन की अगुआई भले मोदी ने नहीं की थी लेकिन उसमें योगदान दिया थ और राम मंदिर से जुड़े विवाद को खत्म कराने और वहां मंदिर निर्माण में उनकी अहम भूमिका मानी जाएगी.

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जब पीएम मोदी गुरुवार को अयोध्या में भूमिपूजन के अनुष्ठान में बैठे तो वो संतों के बीच संत की छवि में ही नजर आए. ऐसा लग नहीं रहा था कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का एक प्रधानमंत्री संतों की भीड़ में अलग है.

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मोदी ने इस मौके पर अपने संबोधन की शुरुआत जय सियाराम के उद्घोष से की. बीजेपी पर अक्सर ये आरोप लगता था कि उसने सियाराम की परंपरा और लोकवाणी को आक्रामक 'जय श्रीराम' में बदल दिया. रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान जय श्रीराम का नारा गूंजता था. उस नारे में एक किस्म की आक्रामकता भी होती लेकिन जब वहां मंदिर बनने जा रहा है तो पीएम मोदी ने जय श्रीराम नहीं बल्कि जय सियाराम का उद्घोष किया. यानी राम से पहले सीता को जोड़ा.

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हिन्दी पट्टी में 'जय राम जी की' अभिवादन के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता रहा है. जब राम जन्मभूमि आंदोलन उफान पर था तो 'जय राम जी की' का अभिवादन जय श्रीराम में भी बदला. लेकिन पीएम मोदी ने संदेश देने की कोशिश की है कि राम जनमानस में जिस तरह से रचे बसे हैं, उसी रूप में रहें. राम केवल अयोध्या तक सीमित नहीं हैं बल्कि राम की छवि भारत से बाहर भी पूजनीय है. वो चाहे इंडोनेशिया हो या मलेशिया हो या थाइलैंड. राम अलग-अलग रूप में अलग-अलग इलाकों में विद्यमान हैं.

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गुरुवार को पीएम मोदी ने श्रीराम के इसी रूप की पताका लहराने की कोशिश की. उम्मीद की जा सकती है कि अयोध्या में राम मंदिर को लेकर जारी दशकों का विवाद एक खुशनुमा माहौल के साथ ही खत्म हो जाएगा.

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