भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण कालखंड का उल्लेख किया गया है. यह बताया गया कि कैसे पूर्व में आतंकवाद के मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था, जिसमें शर्म अल शेख सम्मेलन और बलूचिस्तान का जिक्र शामिल है. वर्तमान नेतृत्व ने आतंकवाद पर वार्ता न करने की नीति अपनाई है.