WFI विवादः जांच कर रही निगरानी कमेटी में बदलाव, BJP नेता और पहलवान बबीता फोगाट हुईं शामिल

WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच के लिए बनाई गई निगरानी कमेटी में बबीता फोगाट को भी शामिल किया गया है. इसकी जानकारी खेल मंत्रालय की ओर से बयान जारी कर दी गई है. मैरी कॉम की अध्यक्षता में ये कमेटी आंदोलन करने वाले पहलवानों के आरोपों की जांच कर रही है.

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रेसलर बबीता फोगाट (फाइल फोटो) रेसलर बबीता फोगाट (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 7:29 AM IST

भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों की जांच के लिए बनाई गई निगरानी कमेटी में कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता और बीजेपी नेता बबीता फोगाट भी शामिल हो गई हैं. खेल मंत्रालय द्वारा बनाई गई कमेटी WFI और उसके अध्यक्ष बृजभूषण शरण के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न, डराने-धमकाने और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच कर रही है. 

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कुश्ती संघ और उसके अध्यक्ष बृजभूषण के खिलाफ जाने-माने पहलवान विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक और रवि दहिया जैसे बड़े नामों ने आरोप लगाए हैं. खेल मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि पूर्व पहलवान बबीता फोगट को युवा मामलों और खेल मंत्रालय द्वारा भारतीय कुश्ती महासंघ के दिन-प्रतिदिन के प्रशासन को संभालने के लिए गठित निगरानी समिति के पैनल में शामिल किया गया है. 

कमेटी की छठी सदस्य बनीं बबीता फोगाट

खेल मंत्रालय ने 5 सदस्यीय निगरानी कमेटी बनाई थी, बबीता इस कमेटी की छठी सदस्य हैं. इस कमेटी की अध्यक्षता मुक्केबाज मैरी कॉम कर रही हैं. इसके अलावा पूर्व पहलवान योगेश्वर दत्त, पूर्व शटलर तृप्ति मुरगुंडे, राधिका श्रीमान और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम के पूर्व सीईओ राजेश राजगोपालन भी शामिल हैं. 

खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने जनवरी महीने की शुरुआत में WFI प्रमुख के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए समिति के गठन की घोषणा की थी और खेल निकाय के दिन-प्रतिदिन के मामलों का प्रबंधन भी किया था. 

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WFI अध्यक्ष को बर्खास्त की मांग को लेकर दिया था धरना

बता दें कि विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया, साक्षी मलिक, सरिता मोरे समेत कई पहलवानों ने WFI अध्यक्ष को बर्खास्त करने की मांग को लेकर तीन दिन तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन दिनों तक धरना दिया था. आंदोलनकारी पहलवानों ने अपना धरना तब खत्म किया जब सरकार ने उन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया. इसके बाद सरकार ने एक जांच कमेटी बनाई और दूसरी निगरानी कमेटी बनाई. ये निगरानी कमेटी WFI का काम संभाल रही है. हालांकि जब कमेटी का गठन किया गया तो आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया था कि इसके लिए उनसे सलाह नहीं ली गई थी. 

 

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