मणिपुर 3 मई से हिंसा की आग में जल रहा है. अब हिंसा की पीड़ित 2 और महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. पीड़ित महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट से मणिपुर हिंसा के पीड़ितों के लिए पोर्टल बनाने की गुहार लगाई है. यौन उत्पीड़न का सामना करने वाली इन महिलाओं की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार को नोटिस जारी किया है.
याचिका में एक पीड़ित महिला ने अपनी मां और भाई की हत्या की भी जांच कराए जाने और दोषियों को सख्त सजा देने की अपील की गई है. याचिका में मांग की गई है कि हिंसा से बचने के लिए राज्य से पलायन कर गए लोगों की शिकायतें, दिक्कत और पीड़ा की शिकायत अपलोड करने के लिए एक पोर्टल बनाने का आदेश दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को भी मुख्य मामले के साथ जोड़ दिया है.
मणिपुर में फैली हिंसा के मध्य में मैतेई और कुकी समाज है. मैतेई समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जनजाति यानी एसटी का दर्जा मांग रहा है. मणिपुर हाई कोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस एमवी मुरलीधरन ने 20 अप्रैल को इस मामले में एक आदेश दिया था. इस आदेश में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई को भी अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग पर विचार करने को कहा था.
कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ 3 मई को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन मणिपुर (ATSUM) ने 'आदिवासी एकता मार्च' निकाला था. ये रैली मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के खिलाफ निकाली गई थी. इसी रैली के दौरान आदिवासियों और गैर-आदिवासियों के बीच हिंसक झड़प हो गई. - इसके बाद से राज्य में लगातार हिंसा की घटनाएं हो रही हैं. अब तक 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, हजारों घरों को जला दिया गया. हिंसा में अब तक 50 हजार से ज्यादा लोग बेघर हुए हैं. ये लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं.
संजय शर्मा