केरल में स्क्रब टाइफस से 38 साल की महिला की मौत, 3 दिन में दूसरी जान गई

इससे पहले 9 जून को वरकला में एक 15 साल की लड़की अश्वथी की मौत हुई थी. वो भी स्क्रब टाइफस से पीड़ित थी. लड़की 40 किलोमीटर दूर स्थित चेरुन्नियूर की रहने वाली थी.

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स्क्रब टाइफस एक संक्रामक बीमारी है. स्क्रब टाइफस एक संक्रामक बीमारी है.

aajtak.in

  • तिरुवनंतपुरम,
  • 12 जून 2022,
  • अपडेटेड 11:36 PM IST
  • इस बीमारी से राज्य में मरने वालों की संख्या दो हुई
  • महिला को दो दिन पहले ही हॉस्पिटल में भर्ती कराया था

केरल में सरकारी मेडिकल कॉलेज में रविवार को स्क्रब टाइफस से पीड़ित 38 साल एक महिला की मौत हो गई. इस महिला को दो दिन पहले ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था. केरल में इस बीमारी से बीते तीन दिन में ये दूसरी मौत है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि सुबिता नाम की महिला तिरुवनंतपुरम की रहने वाली थी. उसे 10 जून को भर्ती कराया गया था. लेकिन आज सुबह उसकी मौत हो गई. अस्पताल का कहना था कि स्क्रब टाइफस से संबंधित अभी हमारे पास ऐसा कोई मामला नहीं है.

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15 साल की बच्ची की भी मौत हुई थी

इससे पहले 9 जून को वरकला में एक 15 साल की लड़की अश्वथी की मौत हुई थी. वो भी स्क्रब टाइफस से पीड़ित थी. लड़की 40 किलोमीटर दूर स्थित चेरुन्नियूर की रहने वाली थी. परिजन का कहना था कि लड़की ने 10वीं कक्षा की परीक्षा दी थी, जल्द ही रिजल्ट आने वाले थे. बता दें कि यहां स्क्रब टाइफस को स्थानीय भाषा में 'चेल्लू पानी' के नाम से जाना जाता है.

क्या है 'स्क्रब टाइफस?

बता दें कि स्क्रब टाइफस एक संक्रामक बीमारी है जो ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी (Orientia tsutsugamushi) बैक्टीरिया के कारण होती है. डॉक्टर्स के मुताबिक, इंसानों में ये बीमारी संक्रमित चिगर्स (लार्वा माइट्स) के काटने से फैलती है. इसे 'बुश टाइफस' के नाम से भी जाना जाता है. यह एक वेक्टर जनित बीमारी है. चिगर्स का लार्वा स्टेज होता है, जो चूहों, गिलहरियों और खरगोशों जैसे जानवरों से इंसानों तक पहुंचाता है.  यदि समय पर इस रोग का इलाज न किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है.

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