तेलंगाना के हनमकोंडा जिले में करीब 300 आवारा कुत्तों की कथित तौर पर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है. इस गंभीर घटना को लेकर पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस अधिकारियों ने रविवार को बताया कि यह मामला पशु क्रूरता से जुड़ा है और इसकी विस्तृत जांच की जा रही है. एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट अदुलापुरम गौतम और फरजाना बेगम ने इस संबंध में 9 जनवरी को श्यामपेट पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी.
उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया गया था कि श्यामपेट और अरेपल्ली गांवों में 6 जनवरी से तीन दिनों के भीतर लगभग 300 आवारा कुत्तों को जहर देकर मार दिया गया. आरोप है कि इन कुत्तों की मौत के बाद उनके शवों को गांवों के बाहरी इलाकों में फेंक दिया गया. अदुलापुरम और फरजाना का आरोप है कि इस पूरे कृत्य में गांवों के सरपंचों और ग्राम पंचायत सचिवों की भूमिका रही.
शिकायत के मुताबिक, सरपंचों और पंचायत सचिवों ने दो लोगों को पैसे देकर आवारा कुत्तों को जहर देने और बाद में उनके शवों को ठिकाने लगाने के लिए नियुक्त किया था. एनिमल वेलफेयर एक्टिविस्ट्स ने इसे अमानवीय और गैरकानूनी बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. पुलिस ने बताया कि शिकायत के आधार पर श्यामपेट थाने में नौ आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
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जांच अधिकारियों के अनुसार, फोन रिकॉर्डिंग और गवाहों के बयानों से यह सामने आया है कि कुछ आरोपियों ने पुलिस में मामला दर्ज होने से पहले पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के साथ निजी बातचीत में आवारा कुत्तों की हत्या की बात स्वीकार की थी. यह मामला उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने इसमें हस्तक्षेप किया. उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर स्थानीय पुलिस को मामला सही तरीके से दर्ज करने के निर्देश दिए. इसके साथ ही उन्होंने पशुओं के अवशेषों का पोस्टमार्टम कराकर फोरेंसिक एविडेंस एकत्र करने पर भी जोर दिया, ताकि जांच को मजबूत किया जा सके.
अधिकारियों ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रतीत होता है और सभी आरोपों की जांच की जा रही है. पुलिस का कहना है कि मामले में शामिल सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी. वहीं, पशु कल्याण संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए राज्य सरकार से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है.
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